{"_id":"615ddbb68ebc3edadf304670","slug":"center-in-supreme-court-even-after-75-years-backward-castes-could-not-be-brought-on-par-with-the-intelligence-of-the-upper-castes","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट में केंद्र: पिछड़ी जातियों को 75 साल बाद भी अगड़ों की मेधा के बराबर नहीं लाया जा सका","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र: पिछड़ी जातियों को 75 साल बाद भी अगड़ों की मेधा के बराबर नहीं लाया जा सका
Wed, 06 Oct 2021 10:54 PM IST
Amit Mandal
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 06 Oct 2021 10:54 PM IST
सार
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह जीवन की सच्चाई है कि हम आजादी के 75 साल बाद भी एससी व एसटी जातियों को सवर्ण जातियों की मेधा के स्तर पर नहीं ला सके हैं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह सच्चाई है कि 75 साल के बाद भी अनुसूचित जाति और जनजातियों को मेधा के मामले में अगड़ी जाति के बराबर नहीं लाया जा सका है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि पिछड़ी जातियों के लोगों के समूह ए श्रेणी की नौकरी में उच्च पदों पर पहुंचना और भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि एससी, एसटी और ओबीसी की रिक्तियों को भरने के लिए सुप्रीम कोर्ट कोई ठोस आधार बताए।
विज्ञापन
एससी, एसटी श्रेणी के लोगों के लिए प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आंकड़ों से पता चला है कि समूह ए की नौकरियों में इन पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व कम है। पीठ ने कहा कि यह उचित नहीं है। इस स्थिति को सुधारे बिना इन जातियों का समूह बी और सी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हो सकता।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा, समूह ए और समूह बी में इनका प्रतिनिधित्व कम है, जबकि समूह सी और डी में ज्यादा प्रतिनिधित्व है। उन्होंने कहा कि यह जीवन की सच्चाई है कि हम आजादी के 75 साल बाद भी एससी व एसटी जातियों को सवर्ण जातियों की मेधा के स्तर पर नहीं ला सके हैं।
विज्ञापन
वेणुगोपाल ने कहा, ए श्रेणी में तो उन्हें अपनी योग्यता के आधार पर ही जगह मिलती है। इसलिए वहां केवल दक्षता पर ध्यान दिया जाता है और पिछड़ापन वहां प्रासंगिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अनुसार केंद्र सरकार में 5000 कैडर और 53 विभाग हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में वह हलफनामा दायर करेंगे। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह ने पीठ को बताया कि 1965 से 2017 के बीच उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ए और बी श्रेणी में प्रतिनिधित्व कम है, जबकि सी और डी में इन जातियों का प्रतिनिधित्व ज्यादा है।