फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Center for Energy Finance Report 101 trillion Dollar needed for zero carbon emissions

सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस का दावा: शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए 101 खरब डॉलर की जरूरत

Fri, 19 Nov 2021 04:09 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 19 Nov 2021 04:09 AM IST
सार

जलवायु परिवर्तन में पिछले आयोजित कॉप26 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत 2050 तक अपनी कुल जरूरत की 50 फीसदी ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करेगा, जबकि 2070 तक हम शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।

विज्ञापन
Center for Energy Finance Report 101 trillion Dollar needed for zero carbon emissions
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

हरित ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने और 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को 101 खरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (सीईएफ) ने बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में दावा किया कि भारत पूरी कोशिश के बावजूद 35 खरब डॉलर का फंड जुटाने में नाकाम रहेगा।

विज्ञापन


जलवायु परिवर्तन में पिछले आयोजित कॉप26 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत 2050 तक अपनी कुल जरूरत की 50 फीसदी ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करेगा, जबकि 2070 तक हम शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
विज्ञापन


इसके बाद सीईएफ ने एक स्वतंत्र अध्ययन में बताया कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को भारी-भरकम निवेश की जरूरत होगी। यह निवेश भारत के औद्योगिक, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र को कार्बन का स्तर घटाने में मदद करेगा। निवेश में 14 खरब डॉलर विकासशील देशों की ओर से क्षतिपूर्ति के तौर पर मिलने हैं। कुल निवेश का 15 खरब डॉलर उद्योगों में लगाना होगा, ताकि ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता को बढ़ाया जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत को हर साल मिलेगी अरबों डॉलर की मदद
रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था सीईईडब्ल्यू के सीईओ अरुणभ घोष ने कहा, विकसित देशों की ओर से भारत को क्षतिपूर्ति के तौर पर मिलने वाली 14 खबर डॉलर की रकम एक समान अनुपात में नहीं मिलेगी। इसे अगले चार दशक में बढ़ते हुए क्रम में वितरित किया जाएगा। पहले दशक में जहां सालाना आठ अरब डॉलर का भुगतान होगा, वहीं आखिरी दशक में हर साल 42 अरब डॉलर की क्षतिपूर्ति दी जा सकती है।


शून्य कार्बन उत्सर्जन सिर्फ हरित ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की रूपरेखा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के उद्योगों और नौकरियों का स्वरूप भी निर्धारित करेगा। शोध के मुख्य लेखक वैभव प्रताप सिंह ने कहा कि निवेश का अधिकतर हिस्सा विदेशी पूंजी और क्षतिपूर्ति के तौर पर आएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed