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बयान: 'अफगानिस्तान से कोई समस्या आती है, तो उससे वैसे ही निपटेंगे जैसे भारत में आतंकवाद से निपटते हैं', बोले सीडीएस
Wed, 25 Aug 2021 02:33 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा
Updated Wed, 25 Aug 2021 02:33 PM IST
सार
सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफगान समस्या को अलग-अलग करार दिया और कहा कि इन दोनों को एक ही चश्मे से देखना ठीक नहीं।
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जनरल बिपिन रावत
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने अफगानिस्तान के हालात और वहां आए तालिबान के शासन को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जहां तक अफगानिस्तान की बात है, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां से भारत आने वाली किसी भी समस्या से हम उसी तरह निपटें, जिस तरह हम भारत में आतंकवाद से निपटते हैं।
जनरल रावत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफगान समस्या को अलग-अलग करार दिया और कहा कि इन दोनों को एक ही चश्मे से देखना ठीक नहीं। उन्होंने कहा, "यह दोनों पूरी तरह अलग-अलग मुद्दे है। हां, ये दोनों मामले क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग सतह पर हैं। यह दो समानांतर रेखाएं हैं, जो शायद ही कभी मिलें।"
सीडीएस ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि अगर सहयोग से आतंकियों की पहचान या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कुछ खुफिया जानकारी मिले, तो इसका स्वागत होगा।"
जनरल रावत ने आगे कहा, "क्षेत्र में जब कहीं कुछ समस्या होती है, तो हमें उसकी चिंता होती है। हमारे उत्तर पर मौजूद पड़ोसी (चीन) ही नहीं, बल्कि हमारी पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) पर मौजूद पड़ोसी के पास भी परमाणु हथियार हैं। इसलिए हम दो ऐसे पड़ोसियों से घिरे हैं, जिनके पास ये कूटनीतिक हथियार हैं।"
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उन्होंने कहा कि इसीलिए हम अपनी नीतियां लगातार विकसित कर रहे हैं। हम अपने पड़ोसियों के एजेंडे को समझने की कोशिश में है। हम इसी हिसाब से अपनी क्षमता विकसित कर रहे हैं। पारंपरिक तौर पर हम काफी मजबूत हैं और किसी भी दुश्मन से अपनी पारंपरिक सेना के जरिए ही निपटने में सक्षम हैं।
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जनरल रावत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफगान समस्या को अलग-अलग करार दिया और कहा कि इन दोनों को एक ही चश्मे से देखना ठीक नहीं। उन्होंने कहा, "यह दोनों पूरी तरह अलग-अलग मुद्दे है। हां, ये दोनों मामले क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग सतह पर हैं। यह दो समानांतर रेखाएं हैं, जो शायद ही कभी मिलें।"
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सीडीएस ने आगे कहा, "मुझे लगता है कि अगर सहयोग से आतंकियों की पहचान या आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कुछ खुफिया जानकारी मिले, तो इसका स्वागत होगा।"
जनरल रावत ने आगे कहा, "क्षेत्र में जब कहीं कुछ समस्या होती है, तो हमें उसकी चिंता होती है। हमारे उत्तर पर मौजूद पड़ोसी (चीन) ही नहीं, बल्कि हमारी पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) पर मौजूद पड़ोसी के पास भी परमाणु हथियार हैं। इसलिए हम दो ऐसे पड़ोसियों से घिरे हैं, जिनके पास ये कूटनीतिक हथियार हैं।"
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उन्होंने कहा कि इसीलिए हम अपनी नीतियां लगातार विकसित कर रहे हैं। हम अपने पड़ोसियों के एजेंडे को समझने की कोशिश में है। हम इसी हिसाब से अपनी क्षमता विकसित कर रहे हैं। पारंपरिक तौर पर हम काफी मजबूत हैं और किसी भी दुश्मन से अपनी पारंपरिक सेना के जरिए ही निपटने में सक्षम हैं।