फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CDS Bipin Rawat and NSA meet on afghanistan giving Indications that China and Pakistan becoming threat to India

सीडीएस और एनएसए की बैठक से मिल रहे संकेत: क्या चीन और पाकिस्तान से भारत के लिए बढ़ रहा है खतरा?

Sat, 13 Nov 2021 02:31 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 13 Nov 2021 02:31 PM IST
सार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत ने एक बार फिर चीन को सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी के बाद पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद में तेजी आने पर भी चिंता जताई है...

विज्ञापन
CDS Bipin Rawat and NSA meet on afghanistan giving Indications that China and Pakistan becoming threat to India
विदेशी राष्ट्रों के एनएसए प्रतिनिधियों के साथ प्रधानमंत्री - फोटो : Agency

विस्तार

एशिया में भारत के लिए बढ़ते खतरे को विदेश मामलों के जानकार अच्छा संकेत नहीं मानते। अफगानिस्तान के बहाने पाकिस्तान भारत की दुखती रग को छेड़ रहा है। चीन दक्षिण एशिया को पाकिस्तान की नजर से ही देख रहा है। जबकि इसके सामानांतर रूस के पत्ते अभी बंद हैं। देश के डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन को भी ताजा पैदा हो रहे हालात पर रूस के स्पष्ट रूख का इंतजार है।

विज्ञापन


मास्को में तैनात रहे विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी का भी कहना है कि अफगानिस्तान में अगस्त में हुए नए घटनाक्रम के बाद अभी भी काफी कुछ धुंधला है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रोडमैप का संकेत देते रहे हैं। लावरोव भारत के साथ मधुर और विश्वसनीय रिश्तों के पक्षधर हैं, लेकिन इसके बाद भी कहा जा रहा है कि रूस की तरफ से अभी कई संकेत आने बाकी हैं।

विज्ञापन

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बताया चीन बड़ा खतरा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत ने एक बार फिर चीन को सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी के बाद पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद में तेजी आने पर भी चिंता जताई है। जनरल रावत ने कहा है कि चीन भारत के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। जनरल के मुताबिक चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारी संख्या में तैनात भारतीय सैनिकों की संख्या में कमी या उनकी वापसी भी अब बहुत आसान प्रक्रिया नहीं है। लंबे समय तक इन्हें वापस नहीं बुलाया जा सकता। जनरल रावत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की भाषा बोलते हुए कहा कि चीन और भारत के बीच में विश्वास में कमी और संदेह काफी बड़ी बाधा है। जनरल रावत ने चीन द्वारा अरुणाचल सीमा के पास गांव बसाए जाने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में चीन इसका इस्तेमाल फौजियों के ठिकाने के रूप में कर सकता है। उन्होंने इस आशंका को बल देते हुए कहा कि चीन ने गांवों को बसाने की योजना लद्दाख में तनातनी बढ़ने के बाद शुरू की है। जनरल रावत ने चीन के साथ-साथ अफगानिस्तान में तालिबान शासन को लेकर भी चिंता जताई। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने की आशंका बताई और थिएटर कमान गठित किए जाने पर जोर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है ताजा घटनाक्रम?

भारत ने 10 नवंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों का सम्मेलन बुलाया था। दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद के इस फोरम पर पाकिस्तान और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों को आमंत्रित किया था। चीन को सम्मेलन में बुलाने के लिए विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय ने काफी मशक्कत की थी। लेकिन चीन ने समय का हवाला देकर आने में आनाकानी की। जबकि पाकिस्तान ने मना कर दिया। इसी को केंद्र में रखकर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर बैठक बुलाई। उसमें तालिबान शासन के प्रतिनिधि, चीन के राजनयिक समेत अन्य शामिल हुए। इसे पाकिस्तान और चीन का अफगानिस्तान मामले में भारत के खिलाफ गठजोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरे भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कार्यालय की प्रमुख चिंता रूस द्वारा बार-बार आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का साथ देने का भरोसा देने के बाद भी खुलकर मुद्दे पर आगे न बढ़ना है। माना यह जा रहा है कि एशिया में राष्ट्रीय हितों को देखकर पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान के तालिबान शासक वर्ग और रूस एक वेवलेंथ पर आ रहे हैं। अमेरिका की नीतियां अभी भी अस्पष्ट हैं। ऐसा होने पर भारत के सामने न केवल मध्य एशिया तक जाने, कारोबार, व्यापार बढ़ाने की चुनौती पैदा हो सकती है, बल्कि देश की सीमा पर घुसपैठ के साथ समुद्री रास्ते से बढ़ते खतरे का भी सामना करना पड़ सकता है।

क्या अफगानिस्तान में कम हो सकती है लोगों की मुसीबत?

यह एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब आसान नहीं है। डिप्टी एनएसए पंकज सरन भी ऐसे सवाल पर अभी कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। सामान्य धारणा है कि अफगानिस्तान में स्थायित्व, शांति और स्थिरता आने पर ही वहां के लोगों की मुसीबत कम हो सकती है। रणनीतिकारों, कूटनीति के जानकारों और सामरिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एकमात्र रास्ता वहां सैन्य बलों को भेजकर लोगों की सुरक्षा को बढ़ाना ही है। यह इतना आसान नहीं है। अमेरिकी सुरक्षाबलों के अफगानिस्तान से लौटने के बाद दुनिया के तमाम देश वहां अस्थिरता, गृह युद्ध की तरफ बढ़ रहे हालात या आतंकवाद की संभावना को लेकर भले चिंता जता रहे हैं, लेकिन सैन्य बल भेजने जैसे कदम उठाने या फिर एकजुटता के साथ मुद्दे के समाधान की तरफ बढ़ने की संभावना से कोसों दूर हैं। इसलिए आतंकवाद समेत अन्य ज्वलंत मुद्दों से निपटने के वैकल्पिक प्रयास अमल में लाए जा रहे हैं।

चुनौती तो है, देखिए कैसे निपटते हैं?

वायुसेना के अवकाश प्राप्त एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि चुनौती तो है। यह देखना होगा कि भारत इसकी कौन सी काट तैयार करता है। पूर्व विदेश सचिव शशांक भी चुनौती बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं करते। हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के सम्मेलन में भारत सहित आठ एनएसए की मौजूदगी को वह काफी सकारात्मक मानते हैं। विदेश मामलों की समझ रखने वाले रंजीत कुमार कहते हैं कि भारत ने पाकिस्तान की मंशा को समझ कर उसमें पेंच फंसा दिया है। आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ेंगी, लेकिन इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि अभी यह नहीं पता कि अगले पल क्या होने वाला है। कौन सा नया बदलाव होगा और अफगानिस्तान में भी नया क्या होगा?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed