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Coal Scam: कोयला घोटाले में आरपीजी इंडस्ट्रीज के खिलाफ केस दर्ज, 10 साल की जांच के बाद कार्रवाई

Wed, 21 Sep 2022 08:25 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 21 Sep 2022 08:25 PM IST
सार

अधिकारियों ने कहा कि आरपीजी इंडस्ट्रीज, आरपीजी एंटरप्राइजेज और कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन (सीईएससी) लिमिटेड को ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का जिक्र शिकायत में किया गया था।

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CBI files coal scam FIR against RPG Industries, others after 10-year-long enquiry
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

सीबीआई ने 10 साल की लंबी शुरुआती जांच के बाद आरपीजी समूह की कंपनियों के खिलाफ कोयला घोटाले के संबंध में एक नई प्राथमिकी दर्ज की है, अधिकारियों ने बुधवार को ये जानकारी दी। एजेंसी ने 1993 से 1995 तक पश्चिम बंगाल में सरिसाटोली, तारा और देवचा पचमी ब्लॉकों की 27 साल पुरानी आवंटन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के संबंध में आरपीजी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आरपीजी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और सीईएससी लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने 19 सितंबर, 2012 को तत्कालीन कांग्रेस सांसद संदीप दीक्षित और छह अन्य सांसदों की एक शिकायत का हवाला दिया था, जिसमें 1993-2004 की अवधि के दौरान 24 कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। 
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अधिकारियों ने कहा कि आरपीजी इंडस्ट्रीज, आरपीजी एंटरप्राइजेज और कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन (सीईएससी) लिमिटेड को ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं का जिक्र शिकायत में किया गया था। शुरुआती जांच के लगभग 10 साल बाद दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरपीजी इंडस्ट्रीज ने 1992 में सीईएससी द्वारा बिजली उत्पादन के लिए निजी खनन ब्लॉक के लिए कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था। मंत्रालय ने इस उद्देश्य के लिए सरिसाटोली कोयला ब्लॉक को शॉर्टलिस्ट किया था। अगले साल सीईएससी ने कहा कि निर्धारित ब्लॉक बज बज और बल्लागढ़ थर्मल पावर स्टेशनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।  
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चौथी स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में कंपनी के अनुरोध पर विचार किया गया और सरिसाटोली, तारा और देवचा पचमी ब्लॉक को बज बज और बल्लागढ़ के लिए अस्थायी रूप से पहचाना गया। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि आरपीजी इंडस्ट्रीज ने मई 1995 में राजस्थान के धौलपुर में एक परियोजना के लिए महान ब्लॉक की मांग करते हुए दो अलग-अलग मंजूरी जमा की। जांच में आगे पता चला कि कंपनियों ने कोयला ब्लॉक प्राप्त करने के लिए प्रस्तावित बिजली संयंत्र के स्वामित्व / विकास / संचालन के बारे में गलत जानकारी प्रस्तुत की। 

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