कावेरी विवाद: कर्नाटक के पक्ष में आए पूर्व प्रधानमंत्री, शुरू की भूख हड़ताल
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कावेरी जल विवाद में कर्नाटक के लिए न्याय की मांग को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरूकर दी है। 83 वर्षीय जनता दल (एस) सुप्रीमो देवगौड़ा राज्य सचिवालय स्थिति महात्मा गांधी की मूर्ति के निकट भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
देवगौड़ा ने भूख हड़ताल का निर्णय शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया जिसमें कर्नाटक से कहा गया है कि वह 6 अक्तूबर तक तमिलनाडु के लिए 6,000 क्यूसेक पानी छोड़े। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड गठित करने को कहा है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री देवगौड़ा ने कहा है कि वह अपने राज्य के लिए न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि जिंदा रहने के लिए पानी आवश्यक है।
कर्नाटक को केंद्र सरकार से न्याय नहीं मिलने तक विरोध जारी रखे की बात ऐलान करते हुए देवगौड़ा ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है कि वह इस विवाद का हल जरूर निकालेंगे। पूर्व पीएम ने कहा कि कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया ने शनिवार को कावेरी विवाद पर आगे की रणनीति तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है, लेकिन वे इसमें शामिल नहीं होंगे।
जानें क्या है कावेरी विवाद
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कर्नाटक ने तमिलनाडु को कावेरी का और पानी देने से इनकार कर दिया था। इससे सरकार के न्यायपालिका से टकराव के हालात बने थे। राज्य सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पास किया कि इसका पानी केवल पीने के लिए है। पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से करीब एक शताब्दी पुराने कावेरी विवाद में कर्नाटक में दोनों सदनों के विशेष सत्र में एक प्रस्ताव पारित कर पीने को छोड़कर किसी अन्य उद्देश्य से पानी नहीं देने का फैसला लिया गया था। डैम में पानी की कम मात्रा को देखकर यह फैसला लिया गया था।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि ऐसी स्थिति है कि कोर्ट के आदेश का पालन करना संभव नहीं है। हालांकि प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र नहीं है, जिसमें कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु को 21 से 27 सितंबर तक 6000 क्यूसेक पानी दे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति उनकी सरकार का बहुत सम्मान है और कोर्ट के आदेश की अवहेलना की उनकी कोई मंशा नहीं है। लेकिन राज्य में पानी की भारी किल्लत है और वह खुद पीने योग्य पानी के लिए जूझ रहा है।