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कैंसर और टिटनेस का इलाज महंगा: दवा की कीमतें 50 फीसदी बढ़ीं, एनपीपीए ने क्या कहा?

Himanshu Mishra हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:24 AM IST
सार

कैंसर और टिटनेस जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज अब महंगा हो जाएगा। इसमें इस्तेमाल होने वाली कुछ जीवनरक्षक दवाओं की कीमतें बढ़ा दी गई हैं।
 

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cancer tetanus medicine price hike nppa decision summary
फोटो-1-एक मेडिकल स्टोर पर विक्रय के लिए रखीं दवाएं। संवाद

विस्तार

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दवाओं की लगातार घटती उपलब्धता और कंपनियों के उत्पादन को घाटे का सौदा बताए जाने के बाद चार जरूरी दवाओं की सीलिंग प्राइस में एकमुश्त 50 % तक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। प्राधिकरण का कहना है कि उद्देश्य दवाओं को महंगा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को ये जीवनरक्षक दवाएं बाजार में लगातार मिलती रहें।
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तीन टीकों की कीमत भी बढ़ी
एनपीपीए ने तीन राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े टीकों की सीलिंग प्राइस भी संशोधित की है। इसमें बीसीजी वैक्सीन की कीमत 8.20 रुपये से बढ़ाकर 9.89 रुपये प्रति डोज कर दी गई है। इसके अलावा मीजल्स-रूबेला (एमआर) वैक्सीन के दाम 72.90 रुपये से बढ़ाकर 87.93 प्रति 0.5 एमएल वायस हो गई है। मीजल्स वैक्सीन की कीमत 51.40 रुपये से बढ़कर 62.00 रुपये प्रति 0.5 एमएल वायल हो गई है।
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दवा पुरानी कीमत नई कीमत
कार्बोप्लैटिन इंजेक्शन (10 mg/ml) ₹60.49 प्रति ml ₹90.74 प्रति ml
सिसप्लैटिन इंजेक्शन (1 mg/ml) ₹7.26 प्रति ml ₹10.89 प्रति ml
एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन 250 IU ₹1,274.68 प्रति वायल ₹1,912.02 प्रति वायल
एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन 500 IU ₹1,920.79 प्रति वायल ₹2,881.19 प्रति वायल


ब्रेस्ट कैंसर का इलाज होगा आसान, 4 नई दवाओं के ट्रायल को भी मंजूरी
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के लिए भी राहत भरी खबर है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने एनहर्टू दवा के दो नए इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की है। अगर अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो इस दवा का इस्तेमाल ऑपरेशन से पहले भी किया जा सकेगा और ऑपरेशन के बाद भी। इससे शुरुआती चरण के एचईआर2-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रहे मरीजों के इलाज के विकल्प बढ़ेंगे और बेहतर नतीजे मिलने की उम्मीद है।
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कैंसर मरीजों के लिए क्यों अहम है फैसला 
कार्बोप्लैटिन और सिसप्लैटिन कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली शुरुआती कीमोथेरेपी दवाओं में शामिल हैं। एनपीपीए के सामने यह चिंता रखी गई कि इनके सक्रिय दवा घटक (एपीआई) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे कंपनियों के लिए उत्पादन मुश्किल हो रहा है और बाजार में इनकी कमी का खतरा पैदा हो गया है। इसी वजह से प्राधिकरण ने सार्वजनिक हित में विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी का फैसला लिया। छह महीने बाद इसकी दोबारा समीक्षा भी की जाएगी।
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