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Bengal: एसआईआर पर कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बैठक, न्यायिक अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
Mon, 23 Feb 2026 11:10 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 23 Feb 2026 11:10 PM IST
सार
Bengal: कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एसआईआर को लेकर बैठक की। बैठक में न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण और सुरक्षा सहित 60 लाख लंबित नामों के मुद्दे पर चर्चा हुई। पढ़ें रिपोर्ट-
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कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल
- फोटो : आधिकारिक वेबसाइट/कलकत्ता हाईकोर्ट
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विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आंतरिक समन्वय बैठक की। यह बैठक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम को लेकर हुई, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी मौजूद थे।
बैठक में एसआईआर की प्रगति पर क्या जानकारी दी गई?
बैठक करीब एक घंटे चली। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इसे आंतरिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि एसआईआर केलिए ऑनलाइन पोर्टल पर न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण सोमवार सुबह पूरा हो गया और कई जगहों पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि ओटीपी से जुड़ी शुरुआती दिक्कतें थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को लेकर क्या निर्देश दिए थे?
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष आदेश में कार्यरत और पूर्व जिला जजों को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए तैनात करने को कहा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की स्थिति में हैं और जिनके दावों व आपत्तियों पर फैसला होना है, उनके मामलों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी करेंगे।
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कितने नाम लंबित हैं और किन जिलों में स्थिति गंभीर है?
मतदाता सूची में गड़बड़ियों में माता-पिता के नाम में अंतर और उम्र में असामान्य अंतर जैसे मामले शामिल हैं। शीर्ष कोर्ट ने चीफ जस्टिस से कुछ न्यायिक अधिकारियों और पूर्व जजों की पहचान करने को कहा था, क्योंकि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त ग्रेड 'ए' अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
ये भी पढ़ें: अरुणाचल की महिलाओं के साथ कथित नस्लीय व्यवहार की मेघालय CM ने की निंदा, कहा- यह स्वीकार नहीं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले करीब 60 लाख नामों का मुद्दा अभी लंबित है। जरूरत पड़ने पर 28 फरवरी के बाद जारी होने वाली पूरक सूची में कुछ नाम जोड़े जा सकते हैं। इनमें सबसे अधिक नाम मुर्शिदाबाद, फिर उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों से हैं।
केंद्रीय बलों की तैनाती पर क्या फैसला हुआ?
बैठक में यह भी तय हुआ कि 200 न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा दी जाएगी। केंद्रीय बलों की तैनाती पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाएगा, न कि आरक्षित रखा जाएगा।
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बैठक में एसआईआर की प्रगति पर क्या जानकारी दी गई?
बैठक करीब एक घंटे चली। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने इसे आंतरिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि एसआईआर केलिए ऑनलाइन पोर्टल पर न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण सोमवार सुबह पूरा हो गया और कई जगहों पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि ओटीपी से जुड़ी शुरुआती दिक्कतें थीं, जिन्हें दूर कर लिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को लेकर क्या निर्देश दिए थे?
20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष आदेश में कार्यरत और पूर्व जिला जजों को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए तैनात करने को कहा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की स्थिति में हैं और जिनके दावों व आपत्तियों पर फैसला होना है, उनके मामलों की सुनवाई न्यायिक अधिकारी करेंगे।
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कितने नाम लंबित हैं और किन जिलों में स्थिति गंभीर है?
मतदाता सूची में गड़बड़ियों में माता-पिता के नाम में अंतर और उम्र में असामान्य अंतर जैसे मामले शामिल हैं। शीर्ष कोर्ट ने चीफ जस्टिस से कुछ न्यायिक अधिकारियों और पूर्व जजों की पहचान करने को कहा था, क्योंकि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त ग्रेड 'ए' अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले करीब 60 लाख नामों का मुद्दा अभी लंबित है। जरूरत पड़ने पर 28 फरवरी के बाद जारी होने वाली पूरक सूची में कुछ नाम जोड़े जा सकते हैं। इनमें सबसे अधिक नाम मुर्शिदाबाद, फिर उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों से हैं।
केंद्रीय बलों की तैनाती पर क्या फैसला हुआ?
बैठक में यह भी तय हुआ कि 200 न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा दी जाएगी। केंद्रीय बलों की तैनाती पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाएगा, न कि आरक्षित रखा जाएगा।
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