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ट्रेंडिंग: NDA सरकार में हुई कोयला खान की नीलामी में कैग को मिली खामियां

Wed, 27 Jul 2016 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 27 Jul 2016 01:23 PM IST
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CAG finds fault with Modi govt's coal block auction.
- फोटो : PTI
क्या मोदी सरकार किसान विरोधी है? ये सवाल इसलिए क्योंकि ट्विटर ट्रेंडिंग में #Modi_किसान_विरोधी पांचवें नंबर पर है। इस मुद्दे पर ट्विटर पर लगातार ट्वीट्स आ रहे हैं। जिसमें मोदी सरकार को घेरा गया है। ट्विटर पर #Modi_किसान_विरोधी का ट्रेंड कैग की उस रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा जिसमें कहा गया कि एनडीए सरकार में कोयला खान की नीलामी में कैग को खामियां मिली हैं।
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पिछले साल राजग सरकार द्वारा कोयला खानों की ई-नीलामी में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खामियां निकाली हैं। कैग का कहना है कि कॉरपोरेट समूहों द्वारा अपने संयुक्त उद्यमों या अनुषंगी कंपनियों द्वारा एक से अधिक बोलियां लगाई गईं। इससे यह सुनिश्चित होता कि शुरुआती दो चरणों में प्रतिस्पर्धा का अपेक्षित स्तर हासिल हो गया होगा।
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मंगलवार को संसद में पेश की रिपोर्ट में कैग ने कहा कि 11 कोयला ब्लॉक की नीलामी में कॉरपोरेट समूहों के संयुक्त उद्यमों और अनुषंगी कंपनियों द्वारा एक से अधिक बोली लगाने के कारण प्रतिस्पर्धा सीमित रही। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऑडिट से यह सुनिश्चित नहीं होता कि शुरुआती दो चरणों में 11 कोल ब्लॉक की नीलामी के दौरान लगी बोलियों में प्रतिस्पर्धा का अपेक्षित स्तर प्राप्त किया गया।’
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CAG finds fault with Modi govt's coal block auction.
कैग ने कहा है, पहले और दूसरे चरण में 29 कोयला खानों में से 11 की सफल ई-नीलामी हुई। ई-नीलामी के चरण में कई पात्र बोली लगाने वाले समान कंपनी, मुख्य कंपनी की अनुषंगी इकाई या संयुक्त उद्यम थे। ऐसी परिस्थिति में जहां मानक निविदा दस्तावेज (एसटीडी) ने संयुक्त उद्यमों को हिस्सा लेने की अनुमति दी और ई-नीलामी में पात्र बोली लगाने वाले की संख्या सीमित कर दी, ऐसे में ऑडिट यह भरोसा नहीं जगता कि शुरुआती दो चरणों में 11 कोयला खानों की हुई नीलामी में प्रतिस्पर्धा का संभावित स्तर प्राप्त किया गया। तीसरे चरण की नीलामी में कोयला मंत्रालय ने संयुक्त उद्यम की हिस्सेदारी की शर्त में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से संशोधन किया।

दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार सही थे नीलामी के प्रावधान
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया जताते हुए आधिकारिक सूत्र ने कहा कि पात्र बोली लगाने वालों में सिर्फ छह फीसदी संयुक्त उद्यम कंपनियां थीं। बोली लगाने में सफल सिर्फ एक संयुक्त उद्यम कंपनी थी। इससे स्पष्ट होता है कि इस प्रावधान से प्रतिस्पर्धा सीमित नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट ने नीलामी के इस प्रावधान को सही ठहराया था।

इस मुद्दे पर ट्विटर ट्रेंडिंग में #Modi_किसान_विरोधी पांचवे नंबर है। देखिए इस मुद्दे पर कुछ ट्वीट, जिनमें से कुछ में मोदी सरकार को घेरा गया है तो वहीं कुछ ट्वीट में एनडीए सरकार का बचाव किया गया है।

ट्विटर ट्रेंडिंग में कुछ ट्वीट्स

CAG finds fault with Modi govt's coal block auction.
मोदी सरकार के विरोध में ट्विटर पर किए गए कुछ ट्वीट...
 

 

 


एनडीए सरकार के बचाव में ये ट्वीट देखिए...
 

 
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