अगर भारतीय 'टाइगर' सीमा पार चला गया तो कोई नहीं लगाएगा हाथ, सम्मान सहित वापस भेजना होगा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार और भूटान की रॉयल सरकार के बीच पर्यावरण के क्षेत्रों में सहयोग करने के मकसद से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी सहमति दे दी है...
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भारतीय टाइगर यानी बाघ को अब कुछ विशेषाधिकार दिए जा रहे हैं। अगर वह घूमता हुआ या शिकार के चक्कर में पड़ोसी देश की सीमा में घुस जाता है, तो उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा। संबंधित देश, उसे सम्मान सहित लौटाएगा। नेपाल और भूटान के साथ यह समझौता किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार और भूटान की रॉयल सरकार के बीच पर्यावरण के क्षेत्रों में सहयोग करने के मकसद से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए अपनी सहमति दे दी है। नेपाल के साथ समझौते को प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। टाइगर के साथ हाथी, गैंडा और सफेद तेंदुआ आदि जानवर भी विशेषाधिकार के दायरे में आ जाएंगे।
मौजूदा समय में अनेक वन्य जीव सीमा पार चले जाते हैं। पहाड़ी या नदी नाले वाले कुछ इलाकों में कंटीली फैंसिंग नहीं होती। ऐसे में बाघ और दूसरे वन्य जीव सीमा के उस पार चले जाते हैं। चूंकि बॉर्डर के आसपास दूसरे देश में भी वन क्षेत्र होता है, इसलिए ज्यादातर जीव वहीं पर घूमते रहते हैं। बाघ के साथ हाथी भी सीमा पार पहुंच जाता है। गैंडा, सफेद तेंदुआ व गिद्ध कई बार सीमा रेखा का उल्लंघन कर देते हैं। ऐसे में दूसरे देश का वन्य प्राणी स्टाफ उन्हें पकड़ लेता है।
चूंकि भारत के अधिकांश वन्य जीवों पर विभाग का कोई न कोई चिन्ह अंकित रहता है, इसलिए उन्हें आसानी से पहचान लिया जाता है कि वे भारतीय सीमा से आए हैं। कई जगह पर कैमरे लगे होते हैं तो उनके जरिए भी मालूम हो जाता है कि फलां जानवर दूसरे देश में चला गया है। इसके बाद वहां का बॉर्डर गार्डिंग फोर्स और वन्य प्राणी विभाग से संपर्क साधा जाता है। कई बार वहां से ये जवाब भी मिलता है कि यहां कोई जानवर नहीं आया है। जानवरों को वापस लाने की प्रक्रिया बहुत लंबी चलती है।
अब पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सीमापार पारिस्थितिकी संरक्षण क्षेत्र की स्थापना के लिए कदम आगे बढ़ाया है। इसके लिए नेपाल और भूटान की सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन की कार्यवाही चल रही है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो के मुताबिक यह समझौता ज्ञापन भारत और उसके पड़ोशी देशों के प्रयोज्य कानूनों एवं उसके उपबंधों को ध्यान में रखकर किया गया है।
इसके द्वारा समता, पारस्परिकता व परस्पर लाभ के आधार पर पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की स्थापना पर जोर दिया गया है। भारत और भूटान के बीच समझौता ज्ञापन के लिए केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। हालांकि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होना बाकी है।
भारत और नेपाल सरकार के बीच इस समझौता ज्ञापन को परामर्शी प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन समझौतों के लागू होने के बाद वन्य जीवों के समग्र संरक्षण में मदद मिलेगी। सीमापारीय सहयोग के माध्यम से पारि-पर्यटन (इको-टूरिज्म) को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय समुदायों की आजीविका में सुधार लाने और अधिकारियों की क्षमताओं में वृद्धि करने में मदद मिलेगी।