Cabinet formation: तीन राज्यों के मंत्रिमंडल में किन्हें मिलेगी जगह? क्षत्रपों की चलेगी या दिखेगा गुजरात मॉडल
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विस्तार
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बन गई है। तीनों ही राज्यों में नए मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों ने शपथ भी ले ली है। शपथ ग्रहण के एक सप्ताह के बाद भी अब तक इन राज्यों में मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो सका है। इस बीच तीनों राज्यों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वसुंधरा, रमन सिंह और शिवराज (वीआरएस) के समर्थकों को नई सरकार की कैबिनेट में जगह मिलेगी या गुजरात की तरह पूरी कैबिनेट ही बदल दी जाएगी या फिर पुराने और नए चेहरों का संतुलन बनाकर कैबिनेट का गठन होगा।
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की जगह पर डॉ. मोहन यादव को सीएम की कुर्सी सौंपी है। जबकि छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की दावेदारी को नज़रअंदाज करते हुए विष्णुदेव साय को सत्ता मिली है। वहीं राजस्थान में वसुंधरा राजे को किनारे कर भजनलाल सीएम बनाए गए हैं। यह पहला मौका है कि इन राज्यों में भाजपा ने जातीय समीकरण को साधने के लिए दो-दो उपमुख्यमंत्री बनाने का भी दांव चला है। यही कारण है कि अब कैबिनेट गठन को लेकर भी तीनों ही राज्यों में सियासी हलचल तेज हो चली है। कैबिनेट गठन को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि पुराने चेहरों को फिर मौका मिलेगा या नए चेहरों पर पार्टी विश्वास जताएगी। ऐसे में देखना है कि क्या मंत्रिमंडल के गठन में भी चौंकाने वाला फैसला हो सकता है?
मध्यप्रदेश में नए और पुराने, दोनों को इसलिए मिलेगा मौका
मध्यप्रदेश की कमान अब डॉ. मोहन यादव के पास है। जबकि जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। राज्य में सीएम और दो डिप्टी सीएम के साथ अधिकतम 34 मंत्री बन सकते हैं। इस बार राज्य में कई भाजपा के दिग्गज नेता चुनाव जीतकर आए हैं, इनमें दो केंद्रीय मंत्री सहित पांच सांसद हैं। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय फिर से विधायक बने हैं। केंद्रीय मंत्री तोमर स्पीकर बन गए हैं। लेकिन प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, रीति पाठक, गोपाल भार्गव जैसे नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जाना है। इसके अलावा भूपेंद्र सिंह, विजय शाह, जयंत मलैया, अर्चना चिटनीस, नारायण सिंह कुशवाह जैसे नेता भी चुनाव जीते हैं। शिवराज सिंह चौहान को भले ही सीएम न बनाया गया हो, लेकिन उनके करीबी नेताओं को मंत्रिमंडल में एंट्री मिल सकती है। इसी तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया के तमाम करीबी नेता चुनाव जीतकर आए हैं, उन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह आसान नहीं है कि शिवराज और सिंधिया के करीबी नेताओं को नजरअंदाज कर दिया जाए।
छत्तीसगढ़ में दिग्गज नेताओं को भी मिलेगी जगह
छत्तीसगढ़ में सीएम और डिप्टी सीएम सहित 14 मंत्री अधिकतम हो सकते हैं। रमन सिंह की जगह विष्णुदेव साय सीएम बने हैं और उनके साथ दो डिप्टी सीएम बने हैं। इस तरह से अब कैबिनेट में 11 मंत्रियों की जगह बच रही है। भाजपा के दो सांसद विधायक बने हैं, उन्हें भी कैबिनेट में जगह देनी होगी। इसके अलावा ओपी चौधरी जैसे दिग्गज नेता जीते हैं और आधा दर्जन से ज्यादा पूर्व मंत्री भी चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। पूर्व सीएम रमन सिंह भले ही विधानसभा अध्यक्ष बना दिए गए हों, लेकिन उनके तमाम करीबी नेताओं को कैबिनेट से इग्नोर करना मुश्किल है। इसके अलावा बृजमोहन अग्रवाल भी जीतकर आए हैं, जो मंत्री बनने वाले नेताओं की रेस में है। ऐसे में देखना है कि मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलती है? वैसे विष्णुदेव साय कैबिनेट में संभावित मंत्रियों के रूप में बृजमोहन अग्रवाल और अमर अग्रवाल (सामान्य वर्ग से), धरमलाल कौशिक और अजय चंद्राकर (ओबीसी), केदार कश्यप और विक्रम उसेंडी (अनुसूचित जनजाति), दयालदास बघेल (अनुसूचित जाति) और राजेश मूणत (जैन समुदाय) के नाम चल रहे हैं। धर्मलाल को छोड़कर बाकी सभी नेता पहले ही मंत्रियों के रूप में काम कर चुके हैं। कैबिनेट में नए चेहरों में आईएएस अधिकारी से नेता बने ओपी चौधरी, गजेंद्र यादव (दोनों ओबीसी) और डोमन लाल कोर्सेवाड़ा (एससी) का नाम भी चल रहा है। इसके अलावा महिला नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह, पूर्व सांसद गोमती साय और पूर्व प्रदेश मंत्री लता उसेंडी के नामों की भी चर्चा है, ये तीनों महिला नेता एसटी समुदाय से हैं।
राजस्थान में भाजपा के लिए बढ़ सकता है संकट
राजस्थान की कैबिनेट में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री सहित कुल 30 मंत्री हो सकते हैं। भजनलाल शर्मा को सीएम, दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को डिप्टी सीएम बनाया गया है। इस तरह से अब कैबिनेट में 27 मंत्री की जगह बच रही है। राजस्थान में भाजपा के तमाम दिग्गज नेता चुनाव जीतकर आए हैं, जिनमें चार भाजपा के सांसद भी हैं, जो विधायक बने हैं। दीया कुमारी डिप्टी सीएम बन गईं हैं, जिसके बाद बाबा बालकनाथ, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और किरोड़ी लाल मीणा जैसे दिग्गज नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देनी होगी। सांसद से सिर्फ विधायक बनने के लिए ये नेता चुनाव नहीं लड़े, बल्कि सरकार में उनकी अहम भूमिका होगी। इसलिए माना जा रहा है कि इन अनुभवी नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।
भाजपा को सबसे ज्यादा मंत्रिमंडल बनाने के लिए राजस्थान में परेशान होना पड़ रहा है। क्योंकि यह वसुंधरा समर्थकों को भी मंत्रिमंडल में जगह देनी होगी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, वसुंधरा राजे ने सीएम की कुर्सी ऐसे ही नहीं छोड़ी, उन्होंने यह पद बहुत बड़ा दिल करके त्यागा है। ऐसे में वसुंधरा राजे के करीबी नेताओं को मंत्रिमंडल से दूर नहीं किया जा सकता है। इस बार के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे के करीबी 28 विधायक भाजपा के टिकट पर जीतकर आए हैं। इसके अलावा जो छह विधायक निर्दलीय बने हैं, उसमें भी ज्यादातर उनके समर्थक हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में महज चार महीने का ही वक्त बचा है, जिसके चलते केंद्रीय नेतृत्व कोई बड़ा जोखिम लेने वाला कदम नहीं उठाएगा। इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा वसुंधरा राजे के कई करीबी नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर एक संतुलन बना सकती है।
वहीं दूसरी ओर सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों को शायद ही मौका दे। कयास हैं कि वसुंधरा समर्थकों के मंत्री बन जाने पर मंत्रिमंडल में अनावश्यक हस्तक्षेप कर सकती हैं, जो शायद पार्टी हाईकमान को मंजूर ना हो। चर्चा है कि जिस तरह भाजपा ने मुख्यमंत्री के रूप में नए चेहरे भजन लाल को मौका दिया। वैसे ही विधायकों के नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दे सकती है।