अब अलग से पेश नहीं होगा रेल बजट, खत्म होगी 92 सालों की परंपरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोदी सरकार ने रेल बजट पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म करने का फैसला किया है। अब सिर्फ एक बजट होगा और वह है आम बजट। अगले वित्त वर्ष से रेल बजट आम बजट में समाहित हो जाएगा। इसके साथ ही आम बजट अब फरवरी से पहले ही पेश हो जाएगा।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि रेल और आम बजट को मिला देने से रेलवे के कामकाज की स्वायत्तता और वित्तीय अधिकारों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उल्टे इससे रेलवे को अपने पूंजीगत खर्चों को बढ़ाने में मदद ही मिलेगी। यानी संसाधन बढ़ाने के लिए उसके पास ज्यादा पूंजी होगी।
अब एक बजट होने से कामकाज ज्यादा आसान होगा। रेलवे को अब सरकार को लाभांश भी नहीं देना होगा। हालांकि सातवें वेतन आयोग के बढ़े हुए वेतन का बोझ इसे ही वहन करना होगा। साथ ही कर्मचारियों के वेतन और मौजूदा और सेवानिवृत कर्मचारियों के पेंशन भुगतान का बोझ भी इसी के हिस्से होगा।
यात्री किराया और माल भाड़ा रेलवे ही तय करेगा
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कै बिनेट के फैसले के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि अब सिर्फ एक बजट होगा और रेलवे से जुड़े सभी प्रावधान आम बजट के हिस्से होंगे। इसलिए अब एक ही विनियोग बिल भी होगा। जेटली ने कहा कि यात्री किराया और माल भाड़ा रेलवे ही तय करेगा।
लेकिन विभाग के खर्चे औैर कमाई से जुड़े हिसाब वित्त मंत्री ही संसद में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा का बजट रेलवे से ज्यादा होता है लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट पेश नहीं होता।
चूंकि इन विभागों का अपना कोई बजट नहीं होता इसलिए अलग से बजट पेश करने का कोई तुक नहीं बनता। नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अगुवाई वाली कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि रेल बजट अब एक परंपरा बन कर रह गई है।
रेल बजट के बारे में कुछ रोचक तथ्य
इसका आकार आम बजट से काफी छोटा है। रिपोर्ट का कहना था कि रेल बजट को सरकार के समग्र राजकोषीय अनुशासन और बजट के विकासवादी नजरिये का हिस्सा होना चाहिए।
वर्ष 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ ने भारत में रेलवे सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए अलग से रेल बजट पेश किए जाने का प्रस्ताव रखा था।
- एक्वर्थ की रिपोर्ट आने के बाद 1924 में पहली बार अलग से रेल बजट पेश किया गया। इससे पहले रेल बजट को आम बजट के साथ ही प्रस्तुत किया जाता था।
- स्वतंत्र भारत का पहला रेल बजट 20 नवंबर, 1947 को यातायात मंत्री डॉ. जॉन मथाई ने पेश किया था।
- वर्ष 1955 में पहली बार बजट के दस्तावेज हिंदी में तैयार किए गए थे।
- जगजीवन राम ने सबसे ज्यादा सात बार रेल बजट पेश किया।
- रेल बजट का टीवी पर सीधा प्रसारण पहली बार 1994 में हुआ।
- ममता बनर्जी पहली महिला रेलमंत्री बनीं। वह 2000 में देश की रेलमंत्री बनीं थीं।
- फरवरी, 2016 में वित्त वर्ष 2016-17 के लिए सुरेश प्रभु द्वारा पेश किया गया अंतिम रेल बजट है।