एचआईवी-एड्स बिल में होगा बदलाव, कैबिनेट ने लिया फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में पेश किए गए एचआईवी/ एड्स बिल (रोक एवं नियंत्रण) 2014 में बदलाव के लिए मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसला लिया गया।
गौरतलब है कि एनडीए सरकार ने जुलाई में इस बिल में कमियां दूर करने के लिए बदलाव की बात कही थी।
उल्लेखनीय है कि इस बिल को पहली बार यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में लोकसभा में पेश किया गया था इस बिल का उद्देश्य एचआईवी/ एड्स पीड़ितों के इलाज में एंटीरेट्रोवायरल उपचार को जरूरी बनाना था।
अब एचआईवी पीड़ितों से भेदभाव की तो खैर नहीं
इस बिल से एचआईवी पीड़ित व्यक्ति के साथ भेदभाव को रोका जा सकेगा और मरीज के इलाज की गोपनीयता को बरकरार रखा जाएगा। नए संशोधन के अनुसार अब किसी प्रतिष्ठान या स्कूल द्वारा रोजगार या शिक्षा देने या चिकित्सा के लिए किसी व्यक्ति के एचआईवी का टेस्ट अनिवार्य करने पर रोक लगा दी गई है।
इस बिल में एचआईवी पीड़ित व्यक्ति से भेदभाव करने पर दोषी के खिलाफ सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।
इसके अलावा इस बिल में प्रावधान किए गए हैं कि हर राज्य सरकार एक लोकपाल को नियुक्त करे ताकि वह एचआईवी पीड़ितों की शिकायतों को दूर करे और भेदभाव करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा सके।