Budget Session:आसान नहीं मोदी सरकार की राह, कृषि कानून समेत इन मुद्दों पर घेरने के लिए विपक्ष तैयार
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देश की राजधानी में नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले दो माह से किसान आंदोलन कर रहे हैं। कृषि कानूनों के पारित होने के बाद से विपक्ष सरकार पर हमलावर है। 29 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में केंद्र सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने अपनी तैयारी कर ली है। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष की ओर से नए कृषि कानून, चीन और कोरोना संकट में गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर सवालों की लंबी सूची तैयार की गई, जिनका जवाब मोदी सरकार को देना होगा। बजट सत्र शुरू होने से एक दिन पहले यानी गुरुवार को प्रमुख विपक्षी नेता सरकार को चौतरफा घेरने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक कर संयुक्त रणनीति बनाएंगे।
बजट सत्र के पहले ही दिन शुक्रवार को कांग्रेस, वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, राजेडी, शिवसेना, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी समेत सभी विपक्षी पार्टियां संयुक्त रूप से विरोध करने की तैयारी में हैं। विपक्ष के एक नेता ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण का बहिष्कार करने का भी सुझाव दिया है। हालांकि, अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है कि विपक्ष राष्ट्रपति के भाषण का बहिष्कार करेगा या नहीं।
संसद का सत्र शुक्रवार को यानी 29 जनवरी से शुरू होगा। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा।अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर घिरी सरकार के लिए ये बजट आसान नहीं होने वाला है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच जारी संग्राम और भारत-चीन सीमा पर तनाव है। बजट सत्र में सरकार की सबसे बड़ी चुनौती कोविड संकट के बीच अर्थव्यवस्था को सुधारने की है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सीपीआईएम प्रमुख सीताराम येचुरी और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं। इस बीच, मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) के निखिल डे को लिखे एक पत्र में सोनिया गांधी ने वादा किया है कि संसद में जब किसान आंदोलन होगा, तो सबसे पहला मुद्दा कांग्रेस उठाएगी। विपक्षी दल तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग करेंगे। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि गैर-भाजपा दल इस सत्र में एकजुट रहेंगे। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि हमारी बैठकें अभी बाकी हैं, लेकिन हमारी कार्ययोजना तैयार हो चुकी है। येचुरी ने कहा कि किसानों का मुद्दा सभी विपक्षी दलों के लिए एक साझा आधार होगा। हम आर्थिक स्थिति और भारत-चीन सीमा तनाव पर बहस की भी मांग करेंगे।