लॉकडाउन 2.0 में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर जब किसानों ने बीएसएफ को कहा 'थैंक्यू'
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जब ये किसान हैवी मशीनरी लेकर वहां पहुंचते हैं, तो बीएसएफ के जवान न केवल किसानों को मास्क और पीपीई किट मुहैया कराते हैं, बल्कि उनकी मशीनों को भी सैनिटाइज करते हैं।
इससे पहले कि किसान अपना काम शुरू करें, बीएसएफ के अधिकारी उन्हें कोरोना वायरस के बचाव, खासतौर पर सामाजिक दूरी बनाए रखने और खुद को सैनिटाइज करने के तौर तरीके बताते हैं।
किसानों के लिए साबुन, स्वच्छ पेयजल, कृषि उपकरणों को संक्रमण मुक्त करने वाले हाइपोक्लोराइड सॉल्यूशन आदि की व्यवस्था की गई है। फसल कटाई के बाद किसान जब अपने घर की तरफ लौटता है तो वह बीएसएफ को थैंक्यू बोलना नहीं भूलता।
बीएसएफ प्रवक्ता के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से 150 गज दूरी पर (कहीं-कहीं यह दूरी ज्यादा भी है) तारबंदी लगाई गई है। चूंकि अब गेहूं की फसल काटी जा रही है, इसलिए पंजाब में अनेक किसान तारबंदी के उस पार पड़ने वाले अपने खेतों में रोजाना आते जाते हैं।
जाब के सरहदी गांवों में रहने वाले ये किसान हार्वेस्टर, ट्रैक्टर और अन्य उपकरण लेकर खेतों में पहुंचते हैं।
ये किसान जब वहां पहुंचते हैं, तो तारबंदी से पहले इन्हें रोक लिया जाता है। कोरोना महामारी के मद्देनजर बीएसएफ के जवान, किसानों को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें कई जरूरी हिदायतें देते हैं। सबसे इनके हाथों को साबुन से धुलवाया जाता है। कई बार सैनिटाइजर का इस्तेमाल होता है।
इसके बाद कृषि मशीनरी एवं दूसरे टूल्स को सैनिटाइज किया जाता है। किसानों को अपने कार्य के दौरान कितना फासला यानी सामाजिक दूरी बनाए रखनी है, यह जानकारी दी जाती है। ये सब औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही उन्हें तारबंदी से आगे जाने देते हैं।
बीच में जब कभी किसी किसान को पानी पीने या खाने के लिए आना होता है तो वह बीएसएफ जवान के पास आ जाता है। जवान उसके हाथ साफ कराता है। किसानों के ट्रैक्टर और कंबाइन मशीनों को रोजाना डिसइन्फेक्शन किया जा रहा है।
इन फसलों को लगाते समय, इनकी देखभाल करते वक्त और इनकी कटाई करने के समय पर सीमा सुरक्षा बल के जवान हमेशा किसानों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।