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‘ लैंसेट’ की सिफारिश: पैनल की मोदी सरकार को सलाह, केंद्रीय प्रणाली बनाकर कोरोना से निपटने की जरूरत

Thu, 27 May 2021 03:57 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 27 May 2021 03:57 PM IST
सार

भारत में कोरोना की दूसरी लहर की रफ्तार भले ही कम हुई है, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। रोजाना ढाई लाख तक के नए मामले सामने आ रहे हैं। इससे निपटने के लिए ब्रिटिश साइंस जनरल लैंसेट ने सरकार को सुझाव दिया है। 

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British journal lancet citizens panels recommendations for centre and state govts over control coronavirus
LECENT - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

ब्रिटिश साइंस जनरल लैंसेट के विशेषज्ञों ने कोरोना से निपटने के लिए भारत सरकार को कुछ सुझाव भेजे हैं। ब्रिटिश मेडिकल पत्रिका ‘लैंसेट’ ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर से उपजे हालात और तीसरी लहर की आशंका के बीच केंद्र और राज्य सरकारों को 8 सुझाव दिए हैं। इसमें वैक्सीन की खरीदी-बंटवारों से लेकर केंद्रीय प्रणाली बनाने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने सरकार से तत्काल इस प्रणाली को लागू करने की सिफारिश की है। 

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गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण ने भारत को बुरी तरह प्रभावित किया है। देश में अभी तक पौने तीन करोड़ मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 3 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। संक्रमण रोकने को लेकर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ब्रिटिश जनरल लैंसेट के सिटीजन पैनल ने संक्रमण को बड़े और खतरनाक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को 8 प्रमुख सुझाव दिए हैं। इसमें वैक्सीन खरीदारी से लेकर बांटने की जिम्मेदारी केंद्र के पास रखने को कहा है। 
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वैक्सीन खरीदारी की हो केंद्रीय प्रणाली 
जर्नल लैंसेट ने अपने रिपोर्ट में सरकार को कहा कि राज्यों के बजाय केंद्र खुद ही वैक्सीन की खरीदारी करे और बांटे। इससे केंद्र के पास राज्यों को दी जाने वाली दवा और अन्य सामग्री की पूरी लिस्ट हो गई। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्रीयकरण के बजाए विकेंद्रीकरण होना जरूरी है। हर जिले की परिस्थिति अलग-अलग हो सकती है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता और फ्रंटलाइन वर्कर्स की आपात स्थिति में फंड और संसाधनों तक पहुंच हो।
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 अस्पताल, ऑक्सीजन और दवा कीमतों में पारदर्शिता जरूरी
जर्नल लैंसेट ने पारदर्शी राष्ट्रीय मूल्य निर्धारण नीति लागू करने की भी सिफारिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी मूल्य निर्धारण से आम जनता को इलाज खर्च कम बहन करना पड़ेगा। राष्ट्रीय मूल्य निर्धारण नीति नहीं होने की वजह से लोगों को महंगा इलाज करना पड़ रहा है। अगर यह नीति लागू होती है तो ज्यादा से ज्यादा इलाज का खर्च स्वास्थ्य बीमा योजनाओं द्वारा कवर होगा। 

केंद्र और राज्यों के बीच तकरार होगी कम
पत्रिका के आलेख में 21 विशेषज्ञों ने लिखा है, ‘‘इस तरह की प्रणाली से उचित मूल्यों का निर्धारण होगा और वैक्सीन एवं ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे राज्यों के बीच असमानता को कम किया जा सकता है.’’ विशेषज्ञों ने बताया कि ये सिफारिशें उन मजबूत कदमों पर केंद्रित हैं जिन्हें केंद्र और राज्य सरकारों को संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच रोकने में मददगार साबित होगा।

असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को नकदी देने की सिफारिश
जर्नल पैनल ने कहा कि वैक्सीन खरीदारी राज्यों को देने के बजाय केंद्र अपने पास रखे,  मुफ्त टीका, सामुदायिक प्रयास और मेडिकल, पैरा-मेडिकल अंतिम वर्ष के छात्रों को कोरोना से जुड़ीं सेवाओं में लगाने और सरकारी-निजी क्षेत्र के हेल्थ वर्कर का इस्तेमाल करने की सिफारिशें की गई हैं। साथ है। राज्य की ओर से पारदर्शी मूल्य नीति और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए नकदी हस्तांतरण के सुझाव दिए हैं। 


पैनल में 21 सदस्य हैं शामिल
बता दें कि लैंसेट सिटीजन पैनल में दुनिया भर के 21 विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें बायोकॉन की किरण मजूमदार वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के प्रो. गगनदीप कांग, नारायण हृदयालय बेंगलुरु के प्रमुख देवी शेट्टी, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के तरुण खन्ना और प्रो. विक्रम पटेल भी हैं। पिछले साल दिसंबर में लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की अगुवाई में यह पैनल गठित हुआ था।

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