श्रम मंत्रालय में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला, सरकार ने चुपचाप किया ओएसडी का ट्रांसफर
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केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्रालय में संगीन घोटाले की बू आ रही है। मामला सामने आने पर सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपते हुए आरोपी अधिकारी का भी चुपचाप तबादला कर दिया है। माना जा रहा है अभी और भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार श्रम मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बंडारू दतात्रेय के ओएसडी के पद पर तैनात श्याम वीर टाँक को उनके पद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है उनके खिलाफ ईपीएफओ के लिए रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके अलावा उन पर फाइलों में फेरबदल के आरोप भी थे।
जानकारी के अनुसार रीजनल प्रोविडेंट फंड्स कमिश्नर रैंक के अधिकारी टाँक ने RPFC-II कैडर के अधिकारियों के वेतनमान में बढोत्तरी के लिए भारी रिश्वत ली थी।
आरपीएफसी कैडर के अधिकारियों का वेतनमान बढ़वाने के लिए ली रिश्वत
इस रकम का बंटवारा ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्यों में भी हुआ। जिसके बाद ट्रस्टियों ने आरपीएफसी 2 रैंक के अधिकारियों के पे स्केल में बढोत्तरी के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे दी।
आरोप यह भी है कि ईपीएफओ में कैडर संबंधी एक महत्वपूर्ण निर्णय से संबंधित टिप्पणी के श्रम मंत्री के पास पहुंचने से पहले उसमें भी छेड़छाड़ की गई। इन सारे मामले के सामने आने के बाद फिलहाल टाँक का तबादला कर दिया गया है।
असल में ये सारा मामला तब सामने आया जब ईपीएफओ सेक्शन ऑफिसर्स एसोसिएशन ने सीबीआई के निदेशक को पत्र लिखकर कैडर में बदलाव संबंधी घोटाले की जानकारी दी। एसोसिएशन के महासचिव देव कुमर ने बताया कि कि 29 मार्च 2016 को केंद्रीय बोर्ड ने कैडर पुनर्गठन के प्रस्ताव को जो कई शर्तों के अधीन था को मंजूरी दे दी। ऐेसे में जब केंद्रीय मंत्री के कार्यालय में श्रम सचिव द्वारा प्रस्ताव जमा कर दिया गया था जब उसमें छेड़छाड़ कैसे कर दी गई।