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ध्वनि की 7 गुना तेजी का बैरियर तोड़ दुश्मन पर कहर बरपाएगी ब्रह्मोस मिसाइल, जानिए खासियतें
एजेंसी, मुंबई
Updated Mon, 30 Apr 2018 02:17 AM IST
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दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को हाइपरसोनिक मिसाइल बनने के लिए 7 मैक की स्पीड का बैरियर तोड़ना होगा। अगले दशक तक ऐसा संभव है। यानी इस मिसाइल को ध्वनि की सात गुना रफ्तार से दागा जा सकेगा।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक सुधीर मिश्रा के अनुसार, हमें हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली में तब्दील होने के लिए सात से दस वर्ष का समय चाहिए। अभी ब्रह्मोस को ध्वनि से 2.8 गुना तेजी से दागा जा सकता है। जल्द ही यह गति बढ़कर 3.5 मैक हो जाएगी। अगले तीन साल में ब्रह्मोस मैक 5 की रफ्तार पा लेगी।
उन्होंने कहा, पूरी कोशिश इस बात की है कि अगली पीढ़ी के युद्धों के लिए एक मिसाइल तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ, आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान मिलकर इस उद्देश्य को हासिल करने का प्रयास कर रहा है। रूसी संस्थान भी इस पर काम कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि मूल मिसाइल प्रणाली को इस तरह आधुनिक बनाया गया है कि इसे युद्धपोतों, पनडुब्बियों, सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और जमीन से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है।
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ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक सुधीर मिश्रा के अनुसार, हमें हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली में तब्दील होने के लिए सात से दस वर्ष का समय चाहिए। अभी ब्रह्मोस को ध्वनि से 2.8 गुना तेजी से दागा जा सकता है। जल्द ही यह गति बढ़कर 3.5 मैक हो जाएगी। अगले तीन साल में ब्रह्मोस मैक 5 की रफ्तार पा लेगी।
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उन्होंने कहा, पूरी कोशिश इस बात की है कि अगली पीढ़ी के युद्धों के लिए एक मिसाइल तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ, आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान मिलकर इस उद्देश्य को हासिल करने का प्रयास कर रहा है। रूसी संस्थान भी इस पर काम कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि मूल मिसाइल प्रणाली को इस तरह आधुनिक बनाया गया है कि इसे युद्धपोतों, पनडुब्बियों, सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और जमीन से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है।