सूखे के हालात ने रोकी पढ़ाई तो किशोर ने ट्रेन से कटकर दे दी जान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूखे के विकट हालात में पढ़ाई रुकने पर एक किशोर ने ट्रेन से कटकर जान दे दी। पिता ने रो-रोकर लाचारी बताई कि चाहकर भी बच्चे को कक्षा नौ में दाखिला नहीं दिला सका। इस पर बेटा दुनिया ही छोड़ गया।
कर्वी (चित्रकूट) के अमिलिहा गांव के धर्मेंद्र कुमार मिश्रा का क्षत-विक्षत शव बुधवार सुबह बदौसा थाना क्षेत्र में पटरी पर पड़ा मिला। पिता ज्वाला प्रसाद ने बताया कि धर्मेंद्र ने इसी साल कक्षा आठ की परीक्षा पास की है। मंगलवार को धर्मेंद्र कक्षा नौ में दाखिला लेने के लिए फीस और किताबें आदि खरीदने को पैसे मांग रहा था।
सूखे के कारण पूरी 18 बीघा जमीन परती पड़ी है। इस कारण वह बेटे की आगे पढ़ने की इच्छा पूरी नहीं कर पाए। बेटे को समझाया भी कि मवेशियों के चारा-भूसा और घर के लिए राशन का इंतजाम करने के बाद उसकी फीस आदि की व्यवस्था का प्रयास करेंगे, पर बेटे को भरोसा नहीं हुआ।
बुधवार सुबह धर्मेंद्र किसी से कुछ कहे बिना घर से निकल गया और ट्रेन से कटकर जान दे दी। दो घंटे बाद पटरी पर उसका शव पड़ा होने की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया। पिता ने बताया कि लगातार तीन साल से फसल न होने से घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है।
इसी कारण दो साल पहले बड़े बेटे की पढ़ाई भी छुड़वानी पड़ी थी। उसे कक्षा 12 में दाखिला नहीं दिला सके थे। अब वह उनके साथ खेतीबाड़ी के काम में हाथ बंटाता है। घर में पत्नी और छोटा बेटा भी है, जो कक्षा पांच में पढ़ रहा है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
गमछे से फांसी लगाकर एक और किसान ने दी जान
ककरबई (झांसी)। रबी की फसल में सामान्य से कम उपज देखकर एक और किसान ने मंगलवार की रात अपने मकान में गमछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इसी वर्ष उसे अपनी बेटी की शादी भी करना थी पर खेती के धोखा दे जाने से वह आर्थिक संकट से घिर गया था।
जानकारी के अनुसार कचीर निवासी देवेंद्र कुमार (42 वर्ष) कृषि कार्य से ही अपने परिवार का गुजारा करता था। मुन्ना के दो बेटे व एक बेटी है। सबसे बड़ी बेटी ममता (20 वर्ष) की शादी इसी वर्ष करना थी। बच्चों के अलावा वृद्ध माता पिता की जिम्मेदारी भी देवेंद्र पर ही थी।
सूखे के चलते इस वर्ष मुन्ना की सारी जमीन असिंचित पड़ी थी, मात्र 6 बीघा भूमि में ही उसने गेहूं की फसल बो रखी थी। मंगलवार को उसने फसल की कटाई व थ्रेसिंग भी करवाई।
फसल का उत्पादन लागत से भी कम होने पर मुन्ना को गहरा आघात लगा तथा शाम के समय घर आकर उसने खाना भी नहीं खाया।परिजनों का कहना है कि बातचीत के दौरान उसने इतना जरूर कहा कि आखिर बेटी ममता का विवाह अब वह कैसे करेगा।
किस प्रकार ग्रामीण बैंक द्वारा लिया गया ऋण चुकता करेगा, इसी उधेड़बुन में वह रात में मकान के छत पर सोने के लिए चला गया। रात में घर के लोगों के सो जाने के बाद वह छत पर बने कमरे के अंदर गया तथा उसने गमछे के सहारे कमरे के अंदर बनी टांड़ पर रखी बल्ली से गमझा बांधकर फांसी लगा ली।
सुबह जब देर तक वह नीचे नहीं आया तो पिता प्रागीलाल ने जाकर देखा तो मुन्ना फांसी पर लटका मिला। परिवार में कोहराम मच गया। तत्काल थानाध्यक्ष ककरबई को सूचना दी गई। थानाध्यक्ष इमरान खान ने घटना स्थल का मुआयना किया व शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए मऊरानीपुर भेज दिया।
तहसीलदार गरौठा बिंद्रा प्रसाद पटेल ने भी घटना स्थल का मुआयना कर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया। ग्राम प्रधान साहब सिंह यादव ने भी उच्चाधिकारियों से संपर्क कर पीड़ित परिवार को राहत दिलाने की मांग की है। देवेंद्र के पिता प्रागी लाल का रो रो कर बुरा हाल है, वहीं बड़ी बेटी ममता भी रोते-रोते बेहोश हो जाती है।