नेताजी की टोपी भेंट करने पर पीएम मोदी ने बोस परिवार को कहा 'शुक्रिया'
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचंद्र बोस की टोपी भेंट किए जाने पर उनके परिवार को धन्यवाद कहा है। यह टोपी पीएम को नेताजी की 122वीं जयंती के अवसर पर दी गई। पीएम ने नेताजी की जयंती पर ऐतिहासिक लाल किले में उनके नाम पर एक संग्रहालय का उद्घाटन किया।
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पीएम ने इसके अलावा लाल किले में याद-ए-जलियां संग्रहालय (जलियांवाला बाग और प्रथम विश्वयुद्ध पर संग्रहालय), 1857 में हुए भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर बने संग्रहालय और भारतीय कला पर बने दृश्यकला संग्रहालय का भी उद्घाटन किया।
I am grateful to the Bose family for presenting me a cap worn by Netaji Bose himself.
— Narendra Modi (@narendramodi) January 23, 2019
The cap has been immediately added to the display gallery at Kranti Mandir in the Red Fort complex.
I hope more youngsters come to Kranti Mandir and get inspired by the life of Netaji Bose. pic.twitter.com/ujl6IBmFX5
पीएम ने ट्वीट कर कहा, "मैं बोस परिवार का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भेंट की। यह टोपी लाल किला परिसर के क्रांति मंदिर की गैलरी में रखी गई है। मैं उम्मीद करता हूं कि युवा क्रांति मंदिर में आएंगे और नेताजी बोस के जीवन से प्रेरित होंगे।"
क्रांति मंदिर देश के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने के लिए लाल किला परिसर में खोले गए संग्रहालय का एक नाम है। यहां प्रदर्शित वस्तुओं में नेताजी द्वारा इस्तेमाल की गई कुर्सी, मेडल, बैज और इंडियन नेशनल आर्मी की (आईएनए) के दिनों की उनकी वर्दी भी शामिल है।
पीएम मोदी याद-ए-जलियां संग्रहालय भी गए। यहां जलियांवाला बाग नरसंहार से संबंधित प्रमाणिक चित्र प्रस्तुत किए गए हैं। ये नरसंहार 13 अप्रैल 1919 को हुआ था। संग्राहलय में प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले भारतीय सैनिकों की वीरगाथा का भी चित्रण किया गया है।
इसके अलावा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में इतिहास के तथ्यों का समावेश किया गया है। इसमें उस समय के भारतीयों के पराक्रम और बलिदान को प्रदर्शित किया गया है। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मौके पर पीएम मोदी की आलोचना की, कि उन्होंने अभी तक बोस की जयंती पर राष्ट्रीय छुट्टी घोषित नहीं की है। बैनर्जी ने कहा, "ऐसा लगता है कि वे उन्हें (नेताजी) राष्ट्रीय नेता नहीं मानते हैं।"
ममता ने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने के लिए नेताजी ने सभी समुदाय और वर्ग के लोगों को अपने साथ लिया। आजाद हिंद फौज (आईएनए) का गठन दार्जिलिंग से लेकर देश के अन्य भागों में रहने वाले लोगों को लेकर किया।