फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   bombay highcourt allow unmarried woman to terminate her over 23 week pregnancy

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 23 सप्ताह से ज्यादा समय की अविवाहित को दी गर्भपात की इजाजत

Thu, 04 Jun 2020 02:49 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 04 Jun 2020 02:49 PM IST
विज्ञापन
bombay highcourt allow unmarried woman to terminate her over 23 week pregnancy
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

बंबई उच्च न्यायालय ने 23 सप्ताह से ज्यादा समय से गर्भवती एक अविवाहित युवती को गर्भपात की इजाजत दे दी। अदालत का कहना है कि शादी से पहले बच्चे को जन्म देने से उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। चिकित्सकीय गर्भपात अधिनियम (एमटीपी) 20 सप्ताह से अधिक समय में गर्भपात की इजाजत नहीं देता है।

विज्ञापन

न्यायमूर्ति एस जे काठवल्ला और न्यायमूर्ति सुरेंद्र तवाड़े ने मंगलवार को यह आदेश दिया और यह भी संज्ञान में लिया कि महाराष्ट्र के रत्नागिरी की रहने वाली 23 वर्षीय युवती कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लागू बंद की वजह से 20 हफ्ते के अंदर गर्भपात के लिए डॉक्टर से संपर्क नहीं कर पाई थी।
विज्ञापन



पीठ ने शुक्रवार को उसे एक चिकित्सा केंद्र में इस प्रक्रिया से गुजरने की अनुमति दे दी। याचिका के बाद 29 मई को उच्च न्यायालय ने रत्नागिरी में एक सरकारी अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड को युवती की जांच का निर्देश दिया था ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस प्रक्रिया से उसके स्वास्थ्य को कोई खतरा तो नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले सप्ताह दायर याचिका में कहा गया है कि वह 23 सप्ताह से ज्यादा समय से गर्भवती है। याचिका में युवती ने कहा कि वह आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध से गर्भवती हुई है। अविवाहित होने की वजह से वह इस गर्भ को नहीं रख सकती है क्योंकि इस बच्चे को जन्म देने से वह ‘सामाजिक उपहास’ का शिकार होगी।

युवती ने अपनी याचिका में कहा कि ‘वह अविवाहित एकल अभिभावक के रूप में बच्चा नहीं संभाल सकती है।’ याचिका में युवती ने कहा कि अगर वह गर्भपात नहीं कराती है तो उसे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ेगा और भविष्य में उसे शादी करने में भी दिक्कत आएगी और वह मानसिक रूप से भी मां बनने के लिए तैयार नहीं हैं।

युवती ने कहा कि बंद की वजह से वह इस संबंध में डॉक्टर से संपर्क नहीं कर पाई। एमटीपी अधिनियम में डॉक्टर से संपर्क के बाद 12 सप्ताह तक का गर्भपात कराया जा सकता है। वहीं 12 से 20 सप्ताह के बीच गर्भपात कराने के लिए दो डॉक्टरों की सहमति आवश्यक है। वहीं 20 सप्ताह बाद कानूनी तौर पर तभी गर्भपात की मंजूरी मिल सकती है जब मां को स्वास्थ्य और जीवन का खतरा न हो।

उच्च न्यायालय ने कहा कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता के शारीरिक स्वास्थ्य पर इसका कोई खतरा नहीं है लेकिन संभव है कि इससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़े। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का कहना है कि वह बंद की वजह से किसी डॉक्टर से नहीं मिल पाई।


युवती का कहना है कि पहले ही अनचाहे गर्भ की वजह से वह काफी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना कर चुकी हैं। पीठ ने कहा कि वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि युवती का इस गर्भ के साथ आगे बढ़ना उसके शारीरिक और मानसिक स्थिति के लिए खतरा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed