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Bombay HC: 'तलवार से मच्छर मार रहे हो', FDA को हाईकोर्ट ने क्यों फटकारा? कहा- शक्ति का इस्तेमाल सोच-समझकर करें

Tue, 11 Aug 2026 08:15 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 11 Aug 2026 08:15 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नियामक को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। क्या था पूरा मामला? कोर्ट ने इतनी सख्त टिप्पणी क्यों की? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Bombay High Court Warns Maharashtra FDA to Use Powers Judiciously, Says Sword to Kill a Mosquito
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि नियामक को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि एफडीए ऐसा कदम उठा रहा है, जैसे 'मच्छर मारने के लिए तलवार' का इस्तेमाल किया जा रहा हो। अदालत ने ऐसी कार्रवाइयों के दोहराए जाने पर भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी।

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मामला कैडिला फार्मास्यूटिकल्स की याचिका से जुड़ा था, जिसमें कंपनी ने कुछ दवाओं के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने एजेंसी को निर्देश दिया कि कोई कठोर कदम उठाने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

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क्या दवाओं की बिक्री रोकने पर हाईकोर्ट पहुंची थी कंपनी?

कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने एफडीए के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत कुछ दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई थी। कंपनी के स्टॉक में करीब 2.45 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं भी जब्त की गई थीं। यह कार्रवाई दवाओं की ब्रांडिंग में समानता को लेकर की गई थी। कंपनी का दावा था कि रोक लगाने के आदेश जारी करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

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क्या FDA ने दवाओं के नाम में भ्रम को बताया कार्रवाई की वजह?

सरकारी वकील नेहा भिड़े ने अदालत को बताया कि संबंधित दवाओं को लेकर भ्रम की स्थिति थी और इसी वजह से कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे एहतियाती कदम बताते हुए कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य कंपनी पर मनमाना दबाव डालना नहीं था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस तरह का कठोर कदम उठाने से पहले विभाग को कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना चाहिए था।

क्या दवाओं पर रोक से मरीजों को भी परेशानी हो सकती थी?

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वह केवल कंपनी को पिछले दो सप्ताह में हुए नुकसान को लेकर चिंतित नहीं है। कोर्ट ने उन लोगों की चिंता भी जताई, जिन्हें इन दवाओं तक पहुंच नहीं मिल पाई। अदालत ने एफडीए को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसी कठोर कार्रवाइयों के मामले सामने आते रहे तो एजेंसी पर भारी लागत लगाई जा सकती है।

कोर्ट ने FDA को 'तलवार और मच्छर' वाली मिसाल क्यों दी?

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि एफडीए के पास कार्रवाई करने की शक्ति है, लेकिन उसका इस्तेमाल उचित तरीके से होना चाहिए। 

कोर्ट ने टिप्पणी की कि एजेंसी के पास 'तलवार' चलाने की शक्ति है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब उस तलवार का इस्तेमाल 'मच्छर मारने' के लिए किया जाता है। अदालत ने कहा कि शक्ति का विवेकपूर्ण और सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में ऐसा लगता है कि पहले कार्रवाई कर दी जाती है और बाद में सवाल पूछे जाते हैं।

क्या FDA अब कंपनी को सुनवाई का मौका देगा?

अदालत की टिप्पणी के बाद सरकारी वकील ने कहा कि एफडीए कंपनी के खिलाफ जारी आदेश वापस लेगा। इसके साथ ही कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उसका पक्ष सुनने के बाद कारणयुक्त आदेश पारित किया जाएगा। एफडीए की ओर से दिए गए इस आश्वासन को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया और याचिका का निपटारा कर दिया।

क्या FDA की पिछली कार्रवाई पर भी कोर्ट ने जताई थी नाराजगी?

इसी पीठ ने शुक्रवार को अमेजन रिटेल इंडिया के एक गोदाम के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई के दौरान भी 'मच्छर और तलवार' वाली टिप्पणी की थी। हालांकि, कोर्ट ने नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई की सराहना भी की थी। अदालत ने सवाल उठाया था कि क्या हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को बंद करना ही ऐसी स्थिति से निपटने का सही तरीका है। एफडीए को व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई करने की सलाह दी गई थी।

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