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Maharashtra: जन्म प्रमाण पत्र पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा-बच्चे के जन्म रिकॉर्ड पर किसी का एकाधिकार नहीं
Thu, 03 Apr 2025 07:34 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 03 Apr 2025 07:34 PM IST
सार
Birth Certificate:
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बंबई उच्च न्यायालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में उलझे माता-पिता अपने अहं की संतुष्टि के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने अपने एक हालिया आदेश में यह टिप्पणी करते हुए कहा कि माता-पिता में से कोई भी बच्चे के जन्म रिकॉर्ड के संबंध में किसी तरह के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
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हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के जस्टिस मंगेश पाटिल और जस्टिस वाईजी खोबरागड़े ने इसके साथ उस महिला की याचिका को खारिज कर दिया, जिसने अपने बच्चे के जन्म संबंधी रिकॉर्ड में माता-पिता के रूप में केवल उसका नाम दर्ज करने का अनुरोध किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका इसका एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे एक वैवाहिक विवाद कई मुकदमों का कारण बनता है।
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अदालत ने लगाया जुर्माना
अदालत ने याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग है तथा कोर्ट के बहुमूल्य समय की बर्बादी है। महिला की तरफ से दायर याचिका में औरंगाबाद नगर निगम के अधिकारियों को ये निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि बच्चे के जन्म रिकॉर्ड में उसका नाम एकल अभिभावक के रूप में दर्ज करें और केवल उसके नाम से जन्म प्रमाणपत्र जारी करें।
क्या था मामला
महिला ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसका अलग रह रहा पति कुछ बुरी आदतों का आदी है और उसने कभी अपने बच्चे का चेहरा भी नहीं देखा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि पिता बुरी आदतों का शिकार है, मां को बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में खुद को एकल अभिभावक के तौर पर दर्ज कराने का अधिकार नहीं मिल जाता।