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Court: 90 साल की बुजुर्ग महिला ने किया मानहानि का मुकदमा, जानें अदालत क्यों बोली- 2046 के बाद करेंगे सुनवाई

Tue, 28 Apr 2026 11:53 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 28 Apr 2026 11:53 PM IST
सार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मानहानि के इस मामले में दोनों पक्षों को कई बार समझौता करने का मौका दिया। हालांकि, इसके बावजूद 90 वर्षीय महिला ने मामले में कार्यवाही को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। अदालत ने सुझाव दिया था कि अगर दोनों पक्ष बिना शर्त माफी मांग लें तो मामले का समाधान हो सकता है।

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Bombay High Court adjourns hearing on defamation suit to 2046 says Ego fight between parties
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक मानहानि के मुकदमे को 2046 तक के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने 2017 के इस मुकदमे को दोनों पक्षों के बीच अहंकार की लड़ाई करार दिया, जो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। अदालत ने इस बात पर निराशा जताई की कि कैसे ऐसे मामले न्याय प्रणाली पर बोझ डालते हैं और ज्यादा जरूरी मामलों की सुनवाई में बाधा पैदा करते हैं।
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मुख्य न्यायाधीश जितेंद्र जैन की पीठ ने कहा कि ऐसे मामले, जिनमें पक्षकार अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर अहंकार की लड़ाई लड़ते हैं, न्याय प्रणाली को जाम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इससे अदालतें उन मामलों को प्राथमिकता नहीं दे पातीं, जिन्हें तत्काल सुनवाई की जरूरत होती है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मानहानि का मुकदमा 2017 में एक बुजुर्ग महिला, तारिणिबहन देसाई द्वारा एक अन्य वरिष्ठ नागरिक किल्किलराज भंसाली के खिलाफ दायर किया गया था। अदालत ने पहले भी ऐसे मौके आए थे, जब उसने सुझाव दिया था कि अगर दोनों पक्ष बिना शर्त माफी मांग लें तो मामले का समाधान हो सकता है।


90 वर्षीय महिला की जिद पर कोर्ट सख्त
हालांकि, करीब 90 वर्षीय तारिणिबहन देसाई ने मानहानि का मुकदमा जारी रखने पर जोर दिया। इससे नाराज होकर अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि इस मामले की सुनवाई 2046 के बाद ही होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के वरिष्ठ नागरिक या अति वरिष्ठ नागरिक होने के आधार पर इसे प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।

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न्यायाधीश बोले- 2046 के बाद सुना जाएगा मामला
न्यायाधीश जितेंद्र जैन ने कहा, "मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता, सिवाय इसके कि इस मामले को अगले 20 वर्षों तक नहीं सुना जाना चाहिए। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई 2046 से पहले नहीं की जाएगी।"

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