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दुकानों में मराठी में नाम लिखने का नियम: महाराष्ट्र सरकार का फैसला बरकरार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया जुर्माना
Wed, 23 Feb 2022 04:35 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 23 Feb 2022 04:35 PM IST
सार
याचिका में महाराष्ट्र की दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर जुर्माना लगा दिया।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा दुकानों और प्रतिष्ठानों को मराठी (देवनागरी लिपि) भाषा में अपना नाम प्रदर्शित करने का नियम उचित है और इसे रद्द करने से इनकार कर दिया। जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस माधव जामदार की खंडपीठ ने फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया और उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उनके डिस्प्ले बोर्ड में किसी अन्य भाषा के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है और नियम के अनुसार दुकान का नाम मराठी में ही प्रदर्शित होना अनिवार्य है।
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मराठी में लिखे साइनबोर्ड का नियम
याचिका में महाराष्ट्र की दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 में संशोधन को चुनौती दी गई थी, जिसके अनुसार सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को मराठी में अपने नाम के साइनबोर्ड प्रदर्शित करने होंगे, जिसका फॉन्ट एक जैसा होगा। दूसरी लिपि की तरह छोटी नहीं। महासंघ ने कहा कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 13 (मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या कम करने वाले कानून), अनुच्छेद 19 (भाषण की स्वतंत्रता के संबंध में कुछ अधिकारों का संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का उल्लंघन है।
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याचिकाकर्ता के वकील मयूर खांडेपारकर ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने अपने इस्तेमाल के लिए मराठी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार अपने नागरिकों पर कोई भाषा नहीं थोप सकती। पीठ ने तब सवाल किया कि याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कैसे किया गया जब सरकार किसी पर किसी अन्य भाषा का उपयोग करने पर रोक नहीं लगा रही है। न्यायमूर्ति पटेल ने कहा, अगर नियम कहता है कि आपको केवल मराठी का उपयोग करना है, तो इस पर चर्चा हो सकती है। यहां आप किसी भी अन्य भाषा का उपयोग कर सकते हैं और इस पर कोई रोक नहीं है। यह बड़े पैमाने पर महाराष्ट्र की जनता की सुविधा के लिए है जिसकी मातृभाषा मराठी है।
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