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Bombay HC: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- पंचायत सदस्यों के लिए दो बच्चों की सीमा में जैविक संतान होंगी शामिल

Sat, 19 Aug 2023 07:03 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 19 Aug 2023 07:03 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने शनिवार को फैसला सुनाया कि महाराष्ट्र में पंचायत सदस्यों के लिए निर्धारित दो बच्चों की सीमा में केवल जैविक संतानें शामिल होंगी, सौतेले बच्चे नहीं।

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Bombay HC ruled Two children limit for panchayat members will include biological offspring not stepchildren
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने शनिवार को ग्राम पंचायत सदस्यों के लिए बच्चों की सीमा को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। नागपुर पीठ ने अपने फैसले में कहा कि महाराष्ट्र में पंचायत सदस्यों के लिए निर्धारित दो बच्चों की सीमा में सिर्फ जैविक संतानें शामिल होंगी, सौतेले बच्चे नहीं।

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जस्टिस एएस चंदुरकर और जस्टिस वृषाली जोशी की खंडपीठ ने खैरुनिसा शेख चांद नाम की महिला की याचिका पर अपना फैसला सुनाया। खंडपीठ ने कहा, खैरुन्निसा शेख के खिलाफ ग्राम पंचायत के सदस्य के रूप में उनकी अयोग्यता को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि उसके तीन से अधिक बच्चे हैं जिसकी सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ गुण-दोष के आधार पर करेगी।
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चांद ने याचिका में दावा किया कि उनके पति शेख चांद के पिछली शादी से दो बेटे थे और अब उनकी शादी से सिर्फ एक बच्चा है। एकल पीठ ने यह स्पष्ट करने के लिए मामले को खंडपीठ के पास भेजा था कि क्या महाराष्ट्र के प्रावधानों में ‘दो बच्चे’ की अभिव्यक्ति है। ग्राम पंचायत अधिनियम का उपयोग सामान्य अर्थ में सौतेले बच्चों को शामिल करने के लिए किया गया है या सीमित अर्थ में सिर्फ उस व्यक्ति से पैदा हुए बच्चों को शामिल करने के लिए किया गया है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अभिव्यक्ति ‘दो बच्चे’ का सदस्य के साथ सीधा संबंध है जिसे अधिनियम के प्रावधान में उपयोग किया जाता है।
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जैविक माता-पिता को बच्चे की कस्टडी सौंपने का निर्देश रद्द
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक निचली अदालत के मार्च 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक बच्चे के दत्तक माता-पिता को बच्चे की कस्टडी जैविक माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया गया था। अदालत के निर्देश के मुताबिक दो वर्षीय बच्चे की गोद लेने की याचिका पर सुनवाई होने तक उसकी कस्टडी उसके जैविक माता-पिता को सौंपी जाएगी। जस्टिस शर्मिला देशुमख की एकल पीठ ने कहा कि निचली अदालत का आदेश माता-पिता को सबूत पेश करने का कोई मौका दिए बिना संक्षिप्त तरीके से पारित किया गया था। हाईकोर्ट दत्तक माता-पिता की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें सिविल कोर्ट की ओर से उनकी गोद लेने की याचिका को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।

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