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Pahalgam: पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि रद्द करने के विरोध पर घिरे नरेश टिकैत; जानें क्या कहा था

Mon, 28 Apr 2025 04:51 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 28 Apr 2025 04:51 PM IST
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BKU leader Naresh Tikait criticized for opposing cancellation of Indus Water Treaty after Pahalgam attack
भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों के द्वारा 26 निर्दोष भारतीय नागरिकों की हत्या के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ जल बंटवारे के लिए की गई सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया है। इसे लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत का बयान कि भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को रद्द करना ठीक नहीं है। देश के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने टिकैत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, भारतीय किसान यूनियन के नेताओं का बयान देशविरोधी ताकतों का समर्थन है। 

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मिश्रा ने कहा, इस बात की जांच होनी चाहिए कि किसके इशारे पर इस प्रकार के पाकिस्तान के समर्थन वाले बयान दिए जा रहें हैं। किसान के नाम पर घोर राजनैतिक आंदोलन चलाने वाले आंदोलन जीवियों के आकाओं की पहचान कर देश की सरकारों द्वारा कड़ी कार्यवाही न करना भी गंभीर मामला है। इसलिए इन लोगों का खुलेआम देश विरोधी ताकतों का मुखौटा बनना आम बात हो गया है। 
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महामंत्री मिश्रा ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, ऐसे बयानों से आतंकवादियों व देश विरोधी शक्तियों को बल मिलता है। देश के दुश्मनों को जड़ से खत्म कर देना ही इस समस्या का हल है। इन तथाकथित नेताओं के बयान का भारत का किसान विरोध करेगा। भारतीय किसान संघ "राष्ट्र हित सर्वोपरि" के भाव को प्रधानता देता है। नरेश टिकैत के राष्ट्र विरोधी शक्तियों का पक्ष लेने वाले वक्तव्य की कड़ी निंदा करता है। 
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मिश्रा ने कहा कि किसान आंदोलन के नाम से जो घटनाक्रम देश के सामने आया था, उससे इन तथाकथित किसान नेताओं के चेहरे उजागर हुए हैं। जम्मू कश्मीर के पहलगाम की घटना के बाद भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को निरस्त करने के निर्णय की खिलाफत भरे भारतीय किसान यूनियन के नेताओं का बयान घोर निंदनीय है। भारतीय किसान संघ की मांग है कि सरकार इन देश विरोधी ताकतों के समर्थित बयान जीवियों की जांच कर कार्रवाई करे। इससे इन लोगों में भी देश हित व राष्ट्र हित सर्वोपरि का भाव जागृत हो सके।

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