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यूपी चुनाव में सपा-बसपा को हो सकती है परेशानी

Tue, 03 Jan 2017 03:34 AM IST
एम संजय/ नई दिल्ली 
एम संजय/ नई दिल्ली  Updated Tue, 03 Jan 2017 03:34 AM IST
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BJP will end BSP-SP power cycle in UP

धर्म, जाति, समुदाय, भाषा के नाम पर वोट मांगने के मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से भाजपा ने राहत की सांस ली है। पार्टी को हिंदूत्व की व्याख्या को लेकर वर्ष 1995 में जस्टिस वर्मा के जरिए दिए गए फैसले को पलटे जाने का डर सता रहा था।

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मगर मुख्य न्यायाधिश टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली बेंच ने चुनाव को धर्मनिरपेक्ष करार देते हुए जो अंतिम फैसला सुनाया है उसमें हिंदूत्व की व्याख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 
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जबकि मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण सरीखे अधिवक्ताओं ने मामले का जिक्र किया था। बावजूद उसके भाजपा अपनी भावी राजनीति के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पूरा अध्ययन कर लेना चाहती है।
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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए पार्टी महासचिव राम माधव ने कहा कि फैसले से धर्म, जाति और भाषा के नाम पर होने वाली राजनीति को खत्म करने में मदद मिलेगी। 

सर्वोच्च न्यायालय के अहम फैसले के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है

BJP will end BSP-SP power cycle in UP

फैसले से भाजपा को होने वाले नफा-नुकशान के मामले पर माधव ने कहा कि निर्णय पर स्पष्टता तभी आएगी जब फैसले का अध्ययन पूरा कर लेंगे। लेकिन सूत्र बताते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के अहम फैसले के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है। 

उसे हिंदूत्व की व्याख्या को लेकर जस्टिस वर्मा के फैसले का डर सता रहा था। वर्मा ने अपने निर्णय में हिंदूत्व को धर्म के बजाय जीवन पद्धति करार दिया है। हालांकि भाजपा नेता यह मान रही है कि न्यायालय के फैसले को जमीन पर अमल कराने में बहुत कठिनाई होगी। 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार यदि कोई न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करते पाया जाता है तो दोष साबित करने की प्रक्रिया इतनी लंबी है कि फैसला आने तक उक्त व्यक्ति का चुनावी टर्म खत्म हो जाता है। बावजूद भाजपा के शीर्ष नेता न्यायालय के फैसले के अध्ययन में जुट गए हैं। 

धर्म, जाति और भाषा को चुनाव से दूर रखने के न्यायालय के निर्णय से क्षेत्रीय दलों की मुश्किलें बढनी तय मानी जा रही हैं। अक्सर क्षेत्रीय दल जाति अथवा भाषा के नाम पर अपनी सियासत चमकाते रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा-सपा की परेशानी बढ़ सकती है। दोनों ही दलों की सियासत में जाति और धर्म के आधार पर वोट मांगने का प्रचलन रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत धर्म और जाति के नाम पर फतवा करने वालों को होगी। 

दल अथवा उम्मीदवार के पक्ष में समुदाय से वोट का फतवा जारी नहीं कर सकता है

BJP will end BSP-SP power cycle in UP

न्यायालय के फैसले के बाद कोई भी व्यक्ति किसी दल अथवा उम्मीदवार के पक्ष में समुदाय से वोट का फतवा जारी नहीं कर सकता है। तो जाति अथवा वर्ग के नाम पर सम्मेलन कर प्रत्याशी और दल के पक्ष में वोट मांगने की परंपरा पर नकेल कसेगी।
 
वैसे धर्म, जाति और भाषा के नाम पर राजनीतिक रोक का प्रावधान जन प्रतिनिधित्व कानून में पहले से है। मगर सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी दल अथवा उम्मीदवार के पक्ष में फतवा करने वाला व्यक्ति भी दोषी माना जाएगा। तो जाति और वर्ग के नाम पर राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों के समर्थन के नाम पर होने वाले सम्मेलनों पर भी ऐसा ही स्पष्ट निर्णय है। 

यदि ऐसे सम्मेलनों में किसी व्यक्ति को वोट देने अथवा किसी दल के पक्ष में मतदान करने का आह्वान हुआ तो आयोजक को ही न्यायालय की अवमानना का दोषी माना जाएगा। दरअसल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई थी कि धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगना जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत करप्ट प्रैक्टिस है या नहीं। 

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