फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BJP upset to 32 years with lk Advani

‘आडवाणी के साथ 32 साल’ भाजपा में मची सियासी हलचल

Fri, 22 Jul 2016 04:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 Jul 2016 04:40 AM IST
विज्ञापन
BJP upset to  32 years with lk Advani
प्रधानमंत्री के साथ लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : ब्यूरो/ इलाहाबाद
भाजपा में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से जुड़ी किताब को लेकर सियासी हलचल शुरू हो गई है। दरअसल, 32 साल तक आडवाणी के सहायक रहे विश्वंभर श्रीवास्तव शुक्रवार को ‘आडवाणी के साथ 32 साल’ पुस्तक लेकर आ रहे हैं जिसे लेकर वरिष्ठ नेता खासे नाराज बताए जा रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेता की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह किताब बगैर उनकी सहमति के प्रकाशित की गई है।
विज्ञापन

 
खास बात यह है कि पुस्तक का लोकार्पण भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी कर रहे हैं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता की जिम्मेदारी पार्टी के एक अन्य सांसद आरके सिन्हा को दी गई है।
विज्ञापन


आडवाणी की इच्छा के विरुद्ध लिखी गई इस किताब को लेकर पार्टी में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि अभी तक मीडिया में पुस्तक से संबंधित जो दो अंश सार्वजनिक हुए हैं, उनमें लेखक ने आडवाणी की तारीफ ही की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अमूमन राजनेताओं से जुड़ी पुस्तकों के लोकार्पण से पहले ही चर्चा में आने का दस्तूर श्रीवास्तव की पुस्तक को लेकर भी कायम है। अनिल प्रकाशन की इस पुस्तक को लेकरकरीब एक महीने से चर्चा थी। इसी बीच, आडवाणी ने पुस्तक के प्रकाशन पर नाराजगी जता कर चर्चाओं का बाजार और गर्म कर दिया है।

बृहस्पतिवार को जारी बयान में आडवाणी के वर्तमान सचिव दीपक चोपड़ा ने कहा है कि हमारी जानकारी के बगैर विश्वंभर श्रीवास्तव ने आडवाणी के साथ 32 साल नामक पुस्तक लिखी है, जिसका लोकार्पण शुक्रवार को होना है। पुस्तक आडवाणी की सहमति के विरुद्ध लिखी गई है। इस बयान के बाद से ही सियासी गलियारे में पुस्तक को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

आडवाणी की ओर से नाराजगी जताने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म

BJP upset to  32 years with lk Advani

अब तक पुस्तक के दो अंश प्रकाशित हुए हैं। दोनों में ही आडवाणी की सिद्घांतप्रियता का जिक्र है। एक अंश में कहा गया है कि आडवाणी ने साल 1989 में अपने पुत्र जयंत को खुद की जगह गांधीनगर से चुनाव लड़ाने संबंधी सलाह को दृढ़ता से ठुकरा दिया था।

तब उन्हें सलाह दी गई थी कि वह खुद नई दिल्ली से लड़ें और जयंत को गांधीनगर से लडने दें। इसकेबाद आडवाणी दोनों जगहों से लड़ेऔर जीते। हालांकि बाद में नई दिल्ली सीट छोडने पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजेश खन्ना ने बाजी मारी।

दूसरे अंश में साल 1977 में सूचना प्रसारण मंत्री बनने पर मिले सुरक्षा तामझाम पर उनकी ओर से जताई गई नाराजगी का जिक्र है। लेखक के मुताबिक अपने घर पर सुरक्षा का व्यापक तामझाम देख कर आडवाणी बुरी तरह भड़क गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed