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भाजपा की रणनीति, शाह के हर दौरे में टीएमसी के बडे़ नेताओं को करेंगे शामिल

Mon, 21 Dec 2020 06:47 AM IST
Jeet Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 21 Dec 2020 06:47 AM IST
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BJP strategy to involve TMC leaders in every visit of amit Shah
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति चुनाव से पहले सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के खिलाफ धारणा की जंग जीतने की है। इसके लिए पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह के हर दौरे में टीएमसी के विधायकों और सांसदों का बारी-बारी से पाला बदलवाने की रणनीति बनाई है। पार्टी की योजना अगले साल मार्च तक टीएमसी में भगदड़ मचाए रखने की है। 

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पार्टी सूत्रों ने बताया, शुभेंदु अधिकारी के पाला बदलने से पहले ही टीएमसी के दो दर्जन विधायक और दो सांसद भाजपा के संपर्क में थे। अब अधिकारी के भाजपा में आने के बाद यह संख्या और बढ़ेगी। इन्हें बारी बारी से भाजपा में शामिल कराया जाएगा। इससे धारणा बनेगी कि राज्य में वाकई टीएमसी अब डूबता हुआ जहाज है।
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इसी रणनीति के तहत पहली कड़ी में शनिवार को शाह के दौरे में सात विधायक-सांसद ने पार्टी का दामन थामा। सूत्रों की मानें तो चुनाव की अधिसूचना जारी होने तक गृहमंत्री कई बार बंगाल का दौरा करेंगे। जनवरी में उनके दो दौरे होंगे और उसके बाद इनकी संख्या बढ़ेगी। हर दौरे में दूसरे दलों के बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल कराया जाएगा। 
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दूसरे दल के नेता भी संपर्क में 
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के संपर्क में वाम दलों और कांग्रेस के भी विधायक हैं। इन्हें भी अलग-अलग समय में पार्टी की सदस्यता दी जाएगी। इससे यह संदेश जाएगा कि राज्य में मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच ही है। और टीएमसी में आया राम गया राम का सिलसिला जारी रहने से उसके भाजपा के मुकाबले कमजोर पड़ने का संदेश जाएगा। 


सभी को नहीं मिलेगा टिकट 
बड़ी संख्या में दूसरे दलों के नेताओं के भाजपा में आने के बाद अंदरखाने उपजे असंतोष की काट भी खोजी गई है। ऐसे नेताओं को भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया जाएगा। हां, पाला बदलने वाले सांसदों को इसकी गारंटी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, दूसरे दलों के ऐसे नेता जिनसे भाजपा के कार्यकर्ता नाराज हैं, उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा। उन्हें चुनाव के बाद कोई जिम्मेदारी दी जाएगी।

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