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पार्टी में नया जोश भर देते हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
शशिधर पाठक
Updated Wed, 26 Apr 2017 06:43 PM IST
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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह परंपरागत राजनीति में यकीन नहीं रखते। कांग्रेस पार्टी के एक राष्ट्रीय महासचिव का मानना है कि अमित शाह किसी पूर्व निर्धारित मानदंड पर काम नहीं करते बल्कि वह हमेशा होमवर्क करके अपने आधार पर नये मानदंड बनाते हैं। केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, पीयुष गोयल और राजीव प्रताप रुडी भी अमित शाह के काम करने के तरीके की तारीफ करते नहीं थकते।
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बताते हैं अमित शाह बड़े विधारधारा को महत्व देते हुए कड़े होमवर्क के साथ नए तरीके अपनाते हैं। यही तरीके और मार्ग दर्शन के बूते न केवल भाजपा को एक के बाद एक राज्य में सत्ता में आने में सफलता मिली,बल्कि दिल्ली के एमसीडी चुनाव में भी पार्टी ने आसानी से जीत दर्ज कर ली। कभी अशोक रोड पर स्थित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय की आईटी सेल में काम कर चुके सूत्र का कहना है कि दिल्ली में यही हुआ। पार्टी ने नगर निगम के चुनाव में पुरने पार्षदों को टिकट ही नहीं दिया। जब प्रत्याशी उतारे गए तो इसको लेकर पार्टी के कई नेता बहुत तंग थे, लेकिन पार्टी के रणनीतिकार जीत के प्रति आश्वस्त थे।
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उ.प्र. चुनाव प्रचार अभियान में लगातार भाजपा अध्यक्ष के संपर्क में आए सूत्र का कहना है कि अमित शाह जमीनी स्तर की तैयारी को न केवल खासा महत्व देते हैं, बल्कि वह सभी विकल्पों पर विचार करके आगे बढ़ते हैं। उ.प्र. और उत्तराखंड में राजनीतिक तैयारियों में यह साफ दिखा भी। उ.प्र. में भाजपा ने बड़ी संख्या में दूसरे दलों से आए लोगों को चुनाव में उतरने का मौका दिया। इतना ही नहीं बसपा, सपा, कांग्रेस या किसी दल को छोडक़र आने वाले चेहरे से परहेज नहीं किया। यही स्थिति असम, महाराष्ट्र, मणिपुर के चुनाव में भी देखने को मिली। केशव प्रसाद मौर्य को उ.प्र. भाजपा अध्यक्ष बनाना, दिल्ली में मनोज तिवारी को पार्टी की कमान देना, योगी आदित्यनाथ का मुख्यमंत्री के रुप में चयन गैर जाटव, गैर यादव, गैर मुस्लिम जातियों पर विशेष ध्यान देकर सामाजिक गठजोड़ तैयार करना उनकी सांगठनिक क्षमता के बल पर देखा जा रहा है।
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इलाहाबाद में प्रचार अभियान में महत्वपूर्ण निभाने वाले सूत्र का कहना है कि चुनाव के बाबत राष्ट्रीय अध्यक्ष का बूथ स्तर पर जोर देना अहम रणनीति थी। चुनाव के दौरान नये तरीके अपनाना, जमीनी कार्य को महत्व देना और कार्यकर्ता में भरोसा जगाने में अमित शाह का कोई सानी नहीं है।