प्रियंका गांधी पर टिप्पणी करके उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहते भाजपा नेता
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प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने को कांग्रेस का ट्रंप कार्ड माना जा रहा था। कांग्रेस के इस ट्रंप कार्ड का असर दिखने भी लगा है। अपनी यात्राओं से लगातार यूपी को मथ रहीं प्रियंका गांधी पर भाजपा के दिग्गज नेता भी अब टिप्पणी करने से बच रहे हैं। भाजपा पर हुए हमलों का सटीक जवाब देने के लिए मशहूर वित्तमंत्री अरुण जेटली भी इससे अछूते नहीं रहे और शुक्रवार को उन्होंने भी प्रियंका गांधी पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इसी तरह गुरुवार को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आयोजित एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी प्रियंका को लेकर पूछे गए सवाल को टाल दिया था।
दरअसल, वित्तमंत्री अरुण जेटली 'हिंदू आतंकवाद' विषय पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर रहे थे। इसी के बाद सवाल-जवाब के दौरान उनसे यह पूछा गया कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आज अयोध्या के दौरे पर हैं और वे कई मंदिरों में जा रही हैं, इस पर भाजपा की क्या प्रतिक्रिया है? वित्तमंत्री ने सवाल सुनते ही इसे एक सिरे से झटक दिया और कहा कि नए-नए लोग राजनीति में जुड़ते ही रहते हैं। वे हर एक पर टिप्पणी करना जरुरी नहीं समझते।
कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की 42 लोकसभा सीटों की विशेष जिम्मेदारी सौंप रखी है। उनके मैदान में आते ही सपा-बसपा गठबंधन सहित भाजपा का भी चुनावी गणित गड़बड़ाता दिख रहा है। प्रियंका गांधी की वजह से देश का मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस की ओर खिसकता दिख रहा है जिसका सीधा नुकसान सपा-बसपा गठबंधन को होने की आशंका जताई जा रही है।
ब्राह्मण वोट बैंक को कांग्रेस की ओर से जा सकती हैं प्रियंका
इसी प्रकार इस बात का भी अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रियंका के आने की वजह से ब्राह्मणों का वोट बैंक कांग्रेस की ओर जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान भाजपा को होना तय माना जा रहा है जो पिछले चुनाव में पूर्वांचल से लगभग 40 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। यही कारण है कि प्रियंका गांधी पर टिप्पणी करने से अखिलेश और मायावती भी सावधानी बरत रहे हैं।
हालांकि, इससे पहले वित्तमंत्री ने आरोप लगाया कि 2007 में हुए समझौता ब्लास्ट में कांग्रेस सरकार के इशारे पर कुछ हिंदुओं को फंसाकर 'हिंदू आतंकवाद' शब्द गढ़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि समाज ने कांग्रेस के इस रुख पर बेहद तल्ख टिप्पणी की और कांग्रेस को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। जेटली ने अपनी बात रखते हुए पंचकुला अदालत के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें आरोपियों नसीमानंद को बरी कर दिया गया।
जेटली ने आरोप लगाया कि निरपराध लोगों को फंसाकर एक साथ हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों को एक साथ धोखा दिया। एक तरफ तो समझौता ट्रेन मामले में मारे गए यात्रियों के परिवारों को भी न्याय नहीं मिला, दूसरी तरफ उसने हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़कर हिंदू समाज को अपमानित करने का प्रयास किया।