{"_id":"61e5f4503f5e4b546e1c1f27","slug":"bjp-leader-ashwini-upadhyay-filed-petition-in-supreme-court-sought-directions-to-election-commission-over-parties-gave-tickets-to-the-tainted-candidates","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: दलों ने दागियों को टिकट क्यों दिया ये बताना सुनिश्चित करे चुनाव आयोग, दायर याचिका में की गई है निर्देश देने की मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: दलों ने दागियों को टिकट क्यों दिया ये बताना सुनिश्चित करे चुनाव आयोग, दायर याचिका में की गई है निर्देश देने की मांग
Tue, 18 Jan 2022 04:27 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 18 Jan 2022 04:27 AM IST
सार
नाहिद हसन गैंगस्टर एक्ट के तहत हिरासत में हैं। उन पर 11 महीने पहले गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था। नाहिद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में नामांकन दाखिल करने वाले पहले उम्मीदवार हैं।
विज्ञापन
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय। (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दागी प्रत्याशियों के बारे में जानकारी छिपाने वाले दलों का पंजीकरण रद्द करने की मांग करने वाली याचिका में भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि राजनीतिक दल शीर्ष अदालत के 2018 और 2020 के फैसलों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया जाए कि हर पार्टी यह बताए कि उसने आपराधिक इतिहास वाले व्यक्ति को क्यों प्रत्याशी बनाया है। याचिका में कैराना से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन का जिक्र है।
विज्ञापन
नाहिद हसन गैंगस्टर एक्ट के तहत हिरासत में हैं। उन पर 11 महीने पहले गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था। नाहिद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में नामांकन दाखिल करने वाले पहले उम्मीदवार हैं। उनके खिलाफ और भी कई आपराधिक मामले हैं और आरोप है कि कैराना से हिंदू पलायन के पीछे मास्टरमाइंड भी वही हैं। विशेष विधायक-सांसद कोर्ट द्वारा उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था।
विज्ञापन
ये था सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी, 2020 के फैसले में निर्देश दिया था कि राजनीतिक दलों को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों के साथ-साथ समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों का विवरण अपलोड करना चाहिए। अदालत ने इस संबंध में वर्ष 2018 के अपने फैसले को दोहराया था और आदेश दिया था कि उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास के विवरण में अपराध की प्रकृति, आरोप तय किए गए हैं या नहीं जैसी जानकारियां शामिल होनी चाहिए।
विज्ञापन
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि पार्टियों को कारण बताना चाहिए कि उम्मीदवार को चुनाव में क्यों उतारा जा रहा है। चुनाव जीतने की क्षमता होना मात्र उम्मीदवार को मैदान में उतारने का कारण नहीं होना चाहिए।
43 फीसदी सांसद दागी
नेशनल इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने वर्तमान लोकसभा के 542 सांसदों में से 539 के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है, जिसमें पता चला है कि 233 (43 फीसदी) सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।