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मध्यप्रदेश में भाजपा ने गड़ाई निगाह, अपने 'विभीषण' और कांग्रेस के 'जयचंदों' पर ध्यान

Fri, 26 Jul 2019 08:09 PM IST
Gaurav Pandey शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Fri, 26 Jul 2019 08:09 PM IST
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BJP is watching over Madhya Pradesh and making strategy for the state
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

मध्यप्रदेश में जो हो रहा है, भाजपा की निगाह में है। कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने सख्त रुख में केवल इशारा भर किया। उन्होंने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के पक्ष में अपने दो विधायकों के समर्थन देने पर कहा, सब कुछ ध्यान में है। दरअसल, भाजपा ने कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश पर अपनी निगाह गड़ा दी है। नड्डा के इस संकेत के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही भाजपा मध्यप्रदेश में कोई बड़ा संदेश दे सकती है। फिलहाल भाजपा की निगाह अपने घर के कुछ और विभीषणों पर है। समझा जा रहा है कि इसी तरह कांग्रेस पार्टी के जयचंदों पर भी मध्यप्रदेश भाजपा के नेता गुणा-गणित तेज कर रहे हैं। 

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अमित शाह ने संभाला मोर्चा

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह संगठन को मजबूत बनाने वाले नेता है। वह किसी भी कीमत पर भाजपा की कोई कड़ी कमजोर नहीं देखना चाहते। बताते हैं मध्यप्रदेश में विधायकों के पार्टी लाइन से अलग जाने के मामले ने उन्हें परेशान किया है। शाह ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह से बात की है। शाह ने इस संबंध में कुछ जानना चाहा है और माना जा रहा है कि अगले कुछ दिन में शिवराज सिंह चौहान और राकेश सिंह इस बाबत उन्हें अपनी जानकारी देंगे। 

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क्या चाहती है भाजपा

राज्य में भाजपा की निगाह अभी अपने संख्या बल और एकजुटता पर है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष नड्डा चाहते हैं कि ब्यौहर विधायक शरद कोल और मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी पार्टी के विधायक की तरह व्यवहार करें। भाजपा में बने रहें। पार्टी एकजुट रहे। इन्हीं दोनों विधायकों ने दंड विधि (संशोधन) विधेयक पर मतविभाजन में सरकार के पक्ष में वोट दे दिया था। शाह और नड्डा ने यह जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री, पार्टी उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान और भाजपा अध्यक्ष कमलनाथ को सौंपी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, सुहास भगत भाजपा हाई कमान की इस इच्छा आगे बढ़ा रहे हैं। इसके लिए शरद कोल और नारायण त्रिपाठी से संपर्क का प्रयास चल रहा है। 

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गोपाल भार्गव को मिली हिदायत 

सूत्र बताते हैं भाजपा ने अपने विधानसभा में नेता गोपाल भार्गव को सोच समझकर बयान देने के लिए कहा है। उन्हें सख्त शब्दों में चेताया भी गया है। गोपाल भार्गव ने विधायकों के सरकार के पक्ष में मतदान के बाद कहा था कि जिस दिन नंबर एक (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) और नंबर दो(अमित शाह) इशारा कर देंगे, मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार गिर जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि इस तरह के बयान शीर्ष नेतृत्व की छवि को खराब करने वाले और राजनीतिक मर्यादा के विपरीत हैं। यह कोई पहली बार नहीं है, जब गोपाल भार्गव के बयान से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व असहज हुआ है। भार्गव को पहले भी सोच समझकर बोलने की सलाह दी जा चुकी है।

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