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चुनावी चंदा: भाजपा को मिला 743 करोड़, कांग्रेस सहित छह राष्ट्रीय पार्टियों से तिगुना

Wed, 13 Nov 2019 09:55 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 13 Nov 2019 09:55 AM IST
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BJP got Rs 743 cr in donations, Know all about electoral bond
electoral bond - फोटो : Social Media

भारतीय जनता पार्टी को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 20,000 रुपये से अधिक के दान में 743 करोड़ रुपये मिले। यह राशि कांग्रेस समेत छह राष्ट्रीय दलों को प्राप्त हुई चंदे की राशि से तीन गुना अधिक है।

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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्तूबर को चुनाव आयोग के सामने दायर हलफनामे में भाजपा ने इस बात का खुलासा किया था। इस जानकारी को सोमवार को सार्वजनिक किया गया। भाजपा को प्राप्त 743 करोड़ रुपये की राशि कांग्रेस सहित अन्य सभी छह राष्ट्रीय दलों को इस तरह के मिले दान में प्राप्त संयुक्त राशि से तीन गुना अधिक है। 
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कांग्रेस को चुनावी दान में 147 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि भाजपा को मिले चंदे का सिर्फ पांचवा हिस्सा ही है। भाजपा को साल 2018-19 में सबसे ज्यादा दान प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट द्वारा दिया गया। इसने भाजपा को 357 करोड़ की राशि चंदे में दी। 

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क्या है चुनावी बॉन्ड स्कीम

चुनावी बॉन्ड व्यवस्था की घोषणा सरकार ने साल 2017 के बजट में की गई थी। इस साल के बजट ने लोगों को अपने पसंदीदा राजनीतिक दल के साथ जुड़ने का एक नया तरीका पेश किया। चुनावी बॉन्ड न तो टैक्स में छूट देते हैं और न ही ब्याज कमाने का साधन हैं। इसे चुनावी फंडिंग में सुधार के तरीके के रूप में प्रस्तावित किया गया है।


निश्चित पार्टियों के लिए एक अधिसूचित बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड जारी किए जाएंगे। यदि आप किसी राजनीतिक पार्टी को दान या चंदा देने के इच्छुक हैं, तो आप इन बॉन्ड को डिजिटल रूप से या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकते हैं। फिर आप एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को उपहार या चंदा देने के लिए स्वतंत्र हैं। 

बॉन्ड संभावित रूप से वाहक बॉन्ड होंगे और देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं होगी। यहां तक की चंदा प्राप्त कर रही पार्टी को भी दानदाता के बारे में पता नहीं चलेगा।

संबंधित पार्टी इन बॉन्ड को अपने बैंक खातों के माध्यम से रुपये में बदल सकती है। इसके लिए उपयोग किए गए बैंक खाते की जानकारी चुनाव आयोग को देना अनिवार्य है। बॉन्ड को एक निश्चित समय अवधि के भीतर ही बैंक में जमा किया जा सकता है। विलंब होने पर इसका भुगतान नहीं हो सकता। इन बॉन्ड में भुगतान होने की समय सीमा निश्चित होती है। 

केवल भारतीय रिजर्व बैंक को ही इन बॉन्डों को जारी करने की अनुमति है, जिन्हें अधिसूचित बैंकों के माध्यम से बेचा जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है चुनावी बॉन्ड

वर्तमान समय में देश के अधिकांश राजनीतिक दल गुमनाम स्रोतों से नकद दान या चंदा स्वीकार करती हैं। इसमें भ्रष्टाचार और गलत ढंग से आय होने की संभावना ज्यादा रहती है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के एक रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्र्रोरल बॉन्ड जारी होने से पहले विभिन्न पार्टियों के फंड में लगभग 70 फीसदी हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आता था।

वर्तमान में, राजनीतिक दलों को आयकर विभाग को 20000 से अधिक के किसी भी चंदे की सूचना देना आवश्यक है। लेकिन पार्टियां इससे बचने के लिए कम मात्रा में नकद चंदे को प्राप्त कर धन भी कमा लेती हैं और आयकर विभाग को जानकारी देने से भी बच जाती हैं।
चुनावी बॉन्ड के जरिए दानदाता बैंक के माध्यम से राजनैतिक दलों को चंदा दे सकेंगे। दानदाता की जानकारी केवल बॉन्ड जारी करने वाले बैंक को ही रहेगी।

आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

बॉन्ड एक हजार, 10 हजार 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ के गुणकों में जारी किए जाते हैं। जो बैंकों के निर्दिष्ट शाखाओं में उपलब्ध होते हैं। उन्हें दानकर्ता द्वारा केवाईसी हुए खाते से खरीदा जा सकता है। दानकर्ता अपनी पसंद की पार्टी को बॉन्ड दान कर सकते हैं। इसे 15 दिनों के भीतर पार्टी के सत्यापित खाते में जमा करना आवश्यक है।

अन्य शर्तें क्या हैं?

जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29 ए के तहत पंजीकृत हर पार्टी को सबसे हालिया लोकसभा या राज्य चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत मतदान प्राप्त हुआ है तो उसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एक सत्यापित खाता आवंटित किया जाएगा। इस खाते के जरिए ही इलेक्टोरल बॉन्ड के ट्रांजेक्शन किए जा सकते हैं।

बॉन्ड प्रत्येक तिमाही की शुरुआत में 10 दिनों की अवधि में खरीद के लिए उपलब्ध होंगे। अर्थात् जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्तूबर के शुरुआती 10 दिनों में। लोकसभा चुनाव के वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा 30 दिनों की अतिरिक्त अवधि प्रदान की जाएगी।

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