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Hindi News ›   India News ›   Bhartiya Janta Party put all its efforts to win Gujarat Assembly Election 2017

पाटीदारों के मोर्चे पर भाजपा ने दमखम वाले नेताओं को जुटाया

Fri, 01 Dec 2017 09:42 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 01 Dec 2017 09:42 AM IST
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Bhartiya Janta Party put all its efforts to win Gujarat Assembly Election 2017
गुजरात विधानसभा चुनाव
पाटीदार समाज में हार्दिक के असर को कम करने की कवायद में भाजपा ने दमखम वाले अपने आधा दर्जन से ज्यादा पाटीदार नेताओं को मोर्चे पर उतार दिया है। अब ये नेता पाटीदार बाहुल्य इलाकों में जाकर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं।
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इस कवायद में केंद्रीय राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने बीते दो दिनों तक सूरत में रहकर भाजपा के लिए बेहद कठिन माने-जाने वाले पाटीदार बाहुल्य विधानसभा सीटों उल्पाड, कामरेज और बराछा में जनसभाओं को संबोधित किया। उनकी सभाओं में कहीं भी समाज की ओर से विरोध के स्वर नहीं दिखाई दिए। जिसे ध्यान में रखते हुए पार्टी की रणनीति सूरत में रूपाला की और सभाएं आयोजित कराने की है। 
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रूपाला के अलावा ये भी उतरे मोर्चे पर 
रूपाला के अलावा भाजपा ने जिन दमखम वाले पाटीदार नेताओं को मोर्चे पर उतारा है। उसमें पूर्व गृहमंत्री गोवर्धन झड़पीया को जूनागढ़, राघव जी को जामनगर, पूर्व मंत्री मनसुख मंडाविया, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, हीरा भाई सोलंकी और शंभूनाथ कुंडिया को मोर्च पर उतारा है। बताया जा रहा है कि शम्भू नाथ कुंडिया की अनुसूचित जाति वाली आरक्षित सीटों पर मांग ज्यादा है। तो हीरा भाई सोलंकी को पार्टी की रणनीति कोली पटेलों के बीच घुमाने की है। सूत्र बताते हैं कि रूपाला को पार्टी ने बनासकांठा, कच्छ, पोरबंदर, अमेरेली और जूनागढ़ के इलाकों में भी भेजने का कार्यक्रम बनाया है। 
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किनारे लगे नेता ही आ रहे काम

Bhartiya Janta Party put all its efforts to win Gujarat Assembly Election 2017
गुजरात विधानसभा चुनाव
गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी की नैय्या पार लगाने के लिए अब किनारे लगे नेताओं की पूछ एकाएक बढ़ गई है। अब तक रूपाला को प्रदेश की राजनीति में नजरअंदाज किया जा रहा था। पीएम मोदी और अमित शाह के गुट के बजाय रूपाला का अपना अलग गुट माना जाता है। सूबे के नेताओं में पीएम मोदी के बाद जनता में सर्वाधिक लोकप्रियता रूपाला की ही है। इसका नजारा बुधवार को पीएम मोदी की नवसारी रैली में भी देखने में नजर आया। 

जब भरत सिंह परमार अपना भाषण दे रहे थे तब कार्यकर्ताओं और जनता के बीच से रूपाला के भाषण की मांग उठी। परमार को अपना भाषण बीच में छोड़ना पड़ा और रूपाला ने भाषण दिया। इसके अलावा मंडाविया को भी पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल का नजदीकी होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। चंद माह पहले केंद्र में उनकी मंत्री की कुर्सी चली गई। 

शांत स्वभाव के वजह से उन्हें सूबे का अगला मुख्यमंत्री गिना जाने लगा गया था। तो गोवर्धन झडपीया भी केशू भाई पटेल के प्रेम की वजह से पार्टी से भीतर बाहर हो चुके हैं। अबकी उन्हें विधायकी के टिकट की उम्मीद थी नहीं मिली। बावजूद उसके झड़पीया समाज के बीच जाकर भाजपा की आवाज बुलंद कर रहे हैं। पार्टी ने उन्हें केशू के गृह जिले जूनागढ़ का रण संभालने को कहा है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल भी अंतिम समय में मुख्यमंत्री बनने से चुक गए थे। बावजूद वे पटेलों के बीच पार्टी के पक्ष में लोहा ले रहे हैं।
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