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पश्चिमी उत्तर प्रदेश बनेगा सभी दलों के लिए 2017 का ‘कुरुक्षेत्र’
नितिन यादव/ अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 26 May 2016 12:08 PM IST
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प्रदेश में मिशन-2017 के लिये असली ‘रण’ वेस्ट यूपी ही होगा। वेस्ट यूपी को लेकर यह तैयारी भाजपा नहीं, बल्कि दूसरे दल भी कर रहे हैं। एकाएक सुरेंद्र नागर को सपा की ओर से राज्यसभा में भेजना इसी रणनीति का हिस्सा है। बसपा ने अपने कैडर वोटरों को साधने के लिए एमएलसी के लिए पुराने कार्यकर्ता को तरजीह दी है। जाट वोटों की अहमियत को देखते हुए रालोद के रुख पर अभी सबकी नजर है।
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मुस्लिम वोटों की अच्छी संख्या होने के कारण सभी दलों के लिये विधानसभा चुनावों में पश्चिम के जिले अपने-अपने हिसाब से अहम हो जाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कराकर भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की थी। पहले चरण में पश्चिम से भाजपा की भारी बढ़त का संदेश पूरे प्रदेश में गया था, जिससे उसे भारी सफलता मिली।
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पश्चिम में जाट वोटरों की भूमिका काफी सशक्त है। इसे ध्यान में रखते हुए चौ. चरण सिंह का जिक्र पीएम ने लोकसभा चुनाव में भी किया था और अब भी संभावना है कि वह अपने भाषण में उन्हें प्रमुखता से याद करें। जाट वोटरों पर पकड़ के लिए जहां केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान लगातार सक्रिय हैं तो स्थानीय स्तर पर भी नेताओं की फौज इस बिरादरी के हिसाब से लगाई गई है। अभी तक रालोद और भाजपा के गठबंधन को लेकर स्थिति साफ नहीं है। भाजपा के कुछ गैर जाट स्थानीय विधायकों ने इस गठबंधन की पैरवी भी की है। रैली में प्रधानमंत्री का चौ. अजित सिंह के प्रति रुख भी उनके भाषण से झलक जाएगा।
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सपा और बसपा भी चल रहे दांव
भाजपा के बड़े दांव का सामना करने के लिये सपा और बसपा ने भी अपने स्तर पर तैयारियां की हैं। सपा ने राज्यसभा के लिए घोषित प्रत्याशी को बदलकर पश्चिम के लिहाज से अहम गुर्जर जाति के सुरेंद्र नागर को टिकट दिया है। यह सीधे तौर पर पश्चिम में अपने आपको मजबूत करने के लिए सपा का दांव है। पश्चिम में गुर्जर वोटरों की संख्या नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर सहित अन्य जिलों में अच्छी-खासी है।
सपा के परंपरागत यादव वोटर पश्चिम में न होने के कारण सपा गुर्जर-मुस्लिम समीकरण से बसपा और भाजपा का मुकाबला चाहती है। कई जिलों में सपा ने गुर्जर जिलाध्यक्ष बनाए तो रामसकल गुर्जर को पश्चिम में लगातार सक्रिय रखा गया है। मेरठ में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद भी गुर्जर के खाते में दिया गया और सुरेंद्र नागर को टिकट देना विधानसभा चुनाव से पहले चला गया मजबूत दांव है। वहीं, बसपा ने मेरठ से जुड़े अतर सिंह राव को एमएलसी का प्रत्याशी घोषित कर यह संदेश दिया है कि वह अपने कैडर वोटर को तरजीह दे रही है। दलित-मुस्लिम समीकरण बनाकर बसपा भाजपा के पक्ष में एकतरफा ध्रुवीकरण को खत्म करना चाहती है। बसपा की मंशा यह है कि वह इस समीकरण के सहारे भाजपा से सीधी टक्कर में दिखाई दे, जिससे मुस्लिम एकतरफा उसके पाले में खड़ा हो।