थियेटर में दिखने लगे कला के रंग, प्ले पोस्टर पर इलस्ट्रेशन
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परिवर्तन प्रकृति का नियम है, यह तथ्य आज कला और संस्कृति के लिए भी लागू होता है। थिएटर की पैदाइश तो हमारी भारतीय संस्कृति में युगों पहले हो गई थी, लेकिन अब इसकी शक्ल में परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
इसी परिवर्तन का एक नया चेहरा थिएटर में आर्ट का इंटरफेरेंस है। इन दिनों मुंबई के आर्टिस्ट मनोज मौर्या द्वारा थिएटर प्ले 'एक कंठ विषपायी' के पोस्टर के लिए बनाया गया इलस्ट्रेशन आर्ट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन हुआ है।
यह इलस्ट्रेशन एब्स्ट्रैक्ट आर्ट फॉर्म में है। नाटक के पोस्टर में संसार के रचयिता भगवान शिव और विनाश की ओर जाता हुआ संसार का अद्भुत समागम प्रस्तुत किया गया है।
पोस्टर में एक नया डायमेंशन
यह इलस्ट्रेशन दुष्यंत कुमार द्वारा लिखित आज के समय के मनुष्य की विनाशकारी सोच से पर्दा उठाता है। इस नाटक का मंचन मुंबई के पृथ्वी थिएटर में किया गया जिसका निर्देशन कुलविंदर बक्शीश ने किया।
आर्टिस्ट मनोज मौर्या से हुई बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि किसी भी आर्ट वर्क को करने से पूर्व उसकी जरूरतों को देखना बेहद जरुरी होता है। अगर लेखक और निर्देशक की दृष्टि से कुछ छूट जाए तो वह काम कलाकार को पूरा करने की जिम्मेदारी होती है।
मनोज के अनुसार उन्होंने लेखक और निर्देशक के दृष्टिकोण में अपना भी नजरिया शामिल करते हुए पोस्टर को नया डायमेंशन (आकार) दिया है। इससे पहले वे मोहनजोदड़ो, कर्ण, अँधा युग, मंच अँधेरे में, मंतो आदि जैसे नाटकों के पोस्टर इलस्ट्रेशन कर चुके हैं।