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BCCI अड़ी, लोढ़ा कमेटी के सामने नहीं पेश होंगे अनुराग ठाकुर और अजय शिर्के

Thu, 03 Nov 2016 09:28 AM IST
हेमंत रस्तोगी/ नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी/ नई दिल्ली Updated Thu, 03 Nov 2016 09:28 AM IST
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BCCI hits a wall, no Lodha panel interaction till pledge to implement reforms
अनुराग ठाकुर - फोटो : getty
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बीसीसीआई के आला अधिकारी जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी के समक्ष पेश नहीं होने जा रहे हैं। कोर्ट की ओर से आदेश दिया गया था कि सिफारिशों को लागू करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव लोढ़ा कमेटी के समक्ष दो सप्ताह के अंदर पेश होंगे। कोर्ट की ओर से दी गई यह समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही है, लेकिन न ही अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और न ही सचिव अजय शिर्के कमेटी के समक्ष पेश होने जा रहे हैं। खबर यह है कि ठाकुर छुट्टियों पर नार्वे गए हुए हैं और वह पांच नवंबर को वापस लौटेंगे। हां, बोर्ड की ओर से पांच नवंबर को लोढ़ा कमेटी के समक्ष एक हलफनामा दाखिल किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की ओर से बोर्ड को लोढ़ा कमेटी की सभी सिफारिशें मानने का हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बोर्ड कमेटी के समक्ष जो हलफनामा दाखिल करेगा उसमें संभावना यही है कि सभी सिफारिशें नहीं मानी जाएंगी, बल्कि अब तक मान ली गई सिफारिशों का ब्योरा होगा। कमेटी के समक्ष अध्यक्ष और सचिव के पेश नहीं होने के पीछे बोर्ड का तर्क है कि न ही कमेटी ने इस संबंध में कोई बैठक बुलाई है और न ही उन्हें इसके लिए बुलाया गया है। बोर्ड पदाधिकारियों का कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना और आधा-अधूरा हलफनामा पेश करना बोर्ड की मुश्किलें बढ़ाएगा। लोढ़ा कमेटी को पांच दिसंबर को होने वाली सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी है, जिसमें बोर्ड के आला अधिकारियों की ओर से अपनाए जा रहे अवमानना के रुख को कड़े शब्दों में बयां किया जा सकता है।
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सूत्र यह भी बताते हैं कि विदर्भ, त्रिपुरा को छोड़ कोई भी राज्य कमेटी या कोर्ट के समक्ष सिफारिशें लागू करने का हलफनामा दाखिल नहीं करने जा रहा है। बोर्ड सोसायटी एक्ट के तहत इसी को अपना हथियार बनाए है। उसका तर्क है कि बोर्ड राज्यों से बनकर खड़ा हुआ है, जब राज्य इसके लिए तैयार नहीं हैं तो वह उसे सिफारिशें लागू करने को बाध्य नहीं कर सकते हैं। वहीं लोढ़ा कमेटी ने भी साफ कर दिया है या तो बोर्ड सिफारिशें लागू करे या सीधे सुप्रीम कोर्ट से निपटे।
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