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Karnataka: मंगलूरू में लगे नाथूराम गोडसे और सावरकर की तस्वीरों वाले बैनर, पुलिस ने हटाया
Fri, 19 Aug 2022 06:50 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलुरू
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 19 Aug 2022 06:50 PM IST
सार
कार्यक्रम का समापन करने से पहले हिंदू महासभा, हिंदू जागरण वेदिके और अन्य सहित भगवा संगठनों के नेताओं ने ब्रह्मगिरी सर्कल से अज्जरकड़ में शहीदों के स्मारक तक एक जुलूस निकाला।
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कर्नाटक पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
नागरिक अधिकारियों ने सूरथकल में एक स्थानीय हिंदू संगठन के नेता द्वारा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे और हिंदुत्व के प्रतीक वी डी सावरकर की तस्वीरों वाले बैनर को हटा दिया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बैनर को हिंदू महासभा के नेता राजेश पवित्रन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई देते हुए लगाया था। मंगलुरु नगर निगम के आयुक्त के आदेश पर अधिकारियों ने गुरुवार को एक शिकायत के तुरंत बाद बैनर हटा दिया।
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सूरथकल में पुलिस सुरक्षा कड़ी
सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह के मद्देनजर सूरथकल में पुलिस सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हिंदू महासभा द्वारा 14 अगस्त को सुरथकल फ्लाईओवर पर सावरकर की तस्वीर वाला एक बैनर प्रदर्शित करने पर विवाद हो गया था। इस बीच उडुपी शहर में सावरकर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्रों के साथ 'हिंदू राष्ट्र' को दर्शाने वाला एक बैनर, जो ब्रह्मगिरी सर्कल में लगाया गया था, शुक्रवार को हिंदू कार्यकर्ताओं ने खुद हटा दिया। एसडीपीआई और कांग्रेस ने इसे हटाने की मांग की थी।
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इसे स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा बनाया गया था। संगठनों के नेताओं के अनुसार, हालांकि उन्हें 15 दिनों के लिए बैनर प्रदर्शित करने की अनुमति मिली थी, लेकिन पुलिस के निर्देश के बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह को देखते हुए इसे हटाने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम का समापन करने से पहले हिंदू महासभा, हिंदू जागरण वेदिके और अन्य सहित भगवा संगठनों के नेताओं ने ब्रह्मगिरी सर्कल से अज्जरकड़ में शहीदों के स्मारक तक एक जुलूस निकाला।
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हिंदू नेताओं ने नगर पालिका से ब्रह्मगिरी सर्कल में सावरकर की एक प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही नगर निगम के अधिकारियों से एक औपचारिक अपील की जाएगी। इससे पहले, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सावरकर की तस्वीर लगाने को लेकर दो समूहों में बहस के बाद शिवमोग्गा में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी। एक समूह ने हिंदुत्व नेता की तस्वीर को एक ऊंचे पोल पर बांध दिया था जबकि दूसरे ने 18 वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान की तस्वीर स्थापित करने की योजना बनाई। इसके बाद यहां तनाव व्याप्त हो गया था।