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कोरोना योद्धाओं का 'निरादर' : रामदेव ने बयान वापस लिया, डॉ. हर्षवर्धन के पत्र के बाद जताया खेद

Sun, 23 May 2021 10:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 23 May 2021 10:39 PM IST
सार

रविवार को बाबा रामदेव ने देश के कोरोना योद्धाओं का निरादर करने वाला अपना बयान वापस ले लिया। इससे पहले केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पत्र लिखकर उनसे इस संबंध में आग्रह किया था। 

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Ramdev withdrew the statement of disrespect of Corona warriors, expressed regret after Harshavardhans letter
बाबा रामदेव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के कोरोना योद्धाओं का कथित तौर पर निरादर करने वाला बयान देने के बाद रविवार को बाबा रामदेव ने खेद जताया। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के पत्र के बाद अपना यह बयान वापस ले लिया।

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बाबा रामदेव ने रविवार रात बयान जारी कहा कि हम आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तथा एलोपैथी के विरोधी नहीं हैं। हम यह मानते हैं कि जीवन रक्षा प्रणाली तथा शल्य चिकित्सा के विज्ञान में एलोपैथी ने बहुत प्रगति की है और मानवता की सेवा की है। मेरा जो वक्तव्य कोट किया गया है वह एक कार्यकर्ता बैठक का वक्तत्व है। जिसमें मैंने आए हुए वॉटसएप मैसेज को पढ़कर सुनाया था, उससे अगर किसी की भावनाएं आहत हुईं, तो मुझे खेद है। 

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आयुर्वेद को 'सूडो साइंस' ना कहा जाए

बाबा रामदेव ने डॉ. हर्षवर्धन को लिखे जवाबी पत्र में कहा कि किसी भी चिकित्सा पद्धति में होने वाली त्रुटियों का रेखांकन उस पद्धति पर आक्रमण के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए, यह विज्ञान का विरोध तो कतई नहीं है। सभी को आत्म मूल्यांकन करते हुए निरंतर प्रगतिशील रहना चाहिए। इसी प्रकार से कुछ एलोपैथिक डॉक्टरों द्वारा भारतीय चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद एवं योग को सूडो साइंस (छद्म विज्ञान) आदि कहकर उसका भी निरादर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भी करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। 


आयुर्वेद ने जटिल रोगों का स्थाई समाधान दिया

बाबा ने कहा कि यदि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने चेचक, पोलियो एवं टीबी आदि गंभीर रोगों का उपचार खोजा है तो योग, आयुर्वेद एवं नेचुरोपैथी आदि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों द्वारा हमने बीपी, शुगर, थॉयराइड, अर्थराइटिस, फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, अस्थमा जैसे जटिल एवं वंशानुगत रोगों का नियंत्रण एवं स्थाई समाधान दिया है। 


डॉक्टरों के साथ हमने भी करोड़ों लोगों की जान बचाई

कोरोना काल में एलोपैथी के डॉक्टरों ने अपनी  जान जोखिम में डालकर करोड़ों लोगों की जान बचाई है, हम उसका सम्मान करते हैं। हमनें भी आयुर्वेद एवं योग से करोड़ों लोगों की जान बचाई है। इसका भी सम्मान होना चाहिए। आगे भी कोरोना व कोरोना की जटिलताओं से लड़ने के लिए तथा पूरी मानवता को रोग मुक्त करने के लिए सब पद्धतियों के समुचित समन्वय से मानवता की सेवा करने के लिए हम पक्षधर हैं और सदा रहेंगे। 


बाबा का वीडियो वायरल हुूआ था

दरअसल, बाबा रामदेव का एलोपैथी को बेवकूफी भरा बताने वाला एक वीडियो वायरल हुआ था। इसको लेकर डॉक्टरों ने आपत्ति जताई थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इसको लेकर बाबा रामदेव को कानूनी नोटिस भी भेजा है। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी रविवार को बाबा को पत्र लिखकर बयान वापस लेने का आग्रह किया था। 



बाबा रामदेव का पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

डॉ. हर्षवर्धन ने पत्र में यह लिखा था
डॉ. हषवर्धन ने रविवार को एक पत्र लिखकर योग गुरु रामदेव से कोरोना योद्धाओं के खिलाफ की गई 'आपत्तिजनक टिप्पणी' को वापस लेने को कहा था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योग गुरु रामदेव के वक्तव्य ने कोरोना योद्धाओं का निरादर कर, देशभर की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। मैंने उन्हें पत्र लिखकर अपना आपत्तिजनक वक्तव्य वापस लेने को कहा। केंद्रीय मंत्री ने बाबा को लिखा कि 'शनिवार को जो आपने स्पष्टीकरण जारी किया था, वह लोगों की चोटिल भावनाओं पर मरहम लगाने में नाकाफी है। कोरोना महामारी के इस संकट भरे दौर में जब एलोपैथी और उससे जुड़े डॉक्टरों ने करोड़ों लोगों को नया जीवनदान दिया है, तब आपका यह कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाखों कोरोना मरीजों की मौत एलोपैथी दवा खाने से हुई।'
 


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