व्हील चेयर पर बैठी वाणी राम की नगरी को सजा-संवार भर रही खुशियों के रंग
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भगवान श्रीराम की पावन अयोध्या नगरी में भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हो चुका है। सदियों का इंतजार खत्म होने पर जब यह घड़ी आई, तो देश से लेकर विदेशों में उत्सव मनाया गया, मिठाइयां बांटी गईं। भूमि पूजन से एक दिन पहले पूरी अयोध्या रोशनी से सराबोर थी। दीपोत्सव के अवसर पर हर घर, सड़क, चौराहा और सरयू तट लाखों दीपकों से जगमग था। इस भव्य नजारे में चार चांद लगाने का काम फूलों और रंगों से रंग-बिरंगी रंगोलियों ने किया।
इन खूबसूरत रंगोलियों को देख हर कोई मंत्रमुग्ध था। कोई रंगोली फूल-कलश से बनी, तो किसी में जीवंत हनुमान की आकृति बड़े ही करीने से उकेरी गई थी। इन खूबसूरत रंगों से फूल-पत्तियों, कलश और कई आकृतियों को उकरने वालों की तलाश की गई, तो व्हील चेयर पर एक हंसता मुस्कुराता चेहरा नजर आया। जो छात्रों का हौसला बढ़ाता दिख रहा था। इस चेहरे का नाम है वाणी शुक्ला। व्हील चेयर पर बैठी वाणी सभी छात्रों को समझा रही थी, उनका हौसला बढ़ा रही थी। साथ ही खुद को कोरोना से बचाने के लिए मास्क पहने रखने और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की हिदायत भी दे रही थी।
वाणी से बात हुई तो पता चला कि पिछले चार साल से राम की पैड़ी को सजाने में वह अहम भूमिका निभा रही है। दिव्यांगता के चलते भले ही कुछ रंग उनकी जिंदगी में कम रह गए हों, लेकिन राम जी की नगरी को सजा-संवारकर उसमें खुशियों के रंग भरने में वह कतई पीछे नहीं रहीं हैं। वाणी कहती हैं कि बचपन में बुखार हो जाने की वजह से व्हील चेयर हमेशा के लिए उनका साथी बन गया। मगर वह निराशा में घिरकर घर नहीं बैठी।
उन्होंने करीब छह साल पहले माता-पिता की मदद से एक एनजीओ 'वाणी विकलांग सेवा संस्थान' की शुरुआत की। इसकी मदद से वह जरूरतमंद व दिव्यांग लोगों की मदद करती है और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना सिखाती हैं। वह दिव्यांग लड़के-लड़कियों को पेंटिंग, कंप्यूटर और डांस सिखा रही हैं। यही नहीं वह सांकेतिक भाषा के माध्यम से उनकी समस्याओं को सुलझाने का भी प्रयास करती हैं।
वाणी कई साल से दीपोत्सव से जुड़ी हुई हैं। वह बताती हैं कि पिछले कई दीपोत्सव में वह भाग ले चुकी हैं और राम की पैड़ी को सजाने संवारने का काम कर रही हैं। हालांकि वह इस मौके को बेहद खास मानती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह दिन दिवाली से कम नहीं है। प्रभु राम जी का मंदिर बनने जा रहा है, इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है।