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काशी में तैयार होगी अविरल गंगा आंदोलन की नई जमीन

Fri, 22 Jul 2016 05:42 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 22 Jul 2016 05:42 AM IST
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Aviral Ganga campaign will start form Varanasi
अविरल गंगा की शुरुआत होगी काशी से - फोटो : Reuters

अविरल गंगा के आंदोलन की नई जमीन काशी में तैयार होगी। इसके लिए गंगा बचाओ अभियान के तहत जन चेतना पैदा करने की कोशिश की जाएगी। यह जानकारी अभियान के संयोजक निलय उपाध्याय ने गुरुवार को दी। कहा कि भारतीय संस्कृति की प्रतीक गंगा की अविरलता, निर्मलता के लिए अब ठोस उपाय नहीं किए गए तो देर हो जाएगी। आने वाले दिनों में गंगा को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

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लंका स्थित अभियान के कार्यालय में निलय ने गुरुवार की दोपहर अमर उजाला से बातचीत में गोमुख से पश्चिम बंगाल तक गंगा के संकट को रेखांकित किया। बताया कि हाल में ही अभियान के तहत कोलकाता से गंगोत्री तक लेखकों की यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान गंगा को कमजोर करने वाले कारणों की पड़ताल की गई। 
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इसके बाद हरिद्वार में हुई बैठक में राष्ट्रीय नदी के रूप में गंगा को मान्यता दिलाने, गंदगी फैलाने से रोकने, गंगा को बांधमुक्त बनाने और प्राकृतिक जल प्रवाह जैसे मुद्दों को उठाया गया। बताया कि फिलहाल गंगा पर वैचारिक आंदोलन की जमीन तैयार करने के लिए लेखकों, संस्कृति कर्मियों, फिल्मकारों और विचारकों का समूह एकजुट होगा। इसका केंद्र काशी होगा।

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अखबार भी प्रकाशित किया जाएगा

Aviral Ganga campaign will start form Varanasi

गंगा के सामाजिक, आर्थिक शास्त्र पर आधारित अखबार भी प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने बंधन, विभाजन, प्रदूषण और गाद को गंगा के कमजोर होने का कारण बताया। गोमुख से गंगा सागर तक पैदल और साइकिल यात्रा निकाल चुके निलय का कहना है कि फर्रूखाबाद के बाद गंगा नाला के शक्ल में हो जाती है।

नरौरा के बाद गंगा में सिर्फ 140 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है। शेष जलराशि पश्चिमी नहरों के जरिए दिल्ली, गाजियाबाद के लोगों की प्यास बुझाने और खेतों की सिंचाई के लिए भेज दी जा रही है। अभियान के प्रवक्ता राघवेंद्र दुबे ने बताया कि अभियान का मकसद समाज के विभिन्न तबके में गंगा के प्रति सामूहिक स्वबोध पैदा करना है।

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