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विदिशा से चुनाव लड़ने आये अटल जी तो राजीव गांधी ने अपने प्रत्याशी से कहा, 'आप कहीं और से लड़ लें'

Fri, 17 Aug 2018 03:19 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
न्यूज डेस्क,अमर उजाला Updated Fri, 17 Aug 2018 03:19 PM IST
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atalji came to vidisha,rajeev asked his candidate to switch seat
अटल-राजीव
भारतीय राजनीति के अजातशत्रु कहे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेई राजीव गांधी के इतने प्रिय थे कि चुनाव की मजबूरी भी इनके बीच कभी नहीं आई। आज ऐसे कई वाक्ये याद किए जा रहे हैं जहां दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उन्होने अपने विपक्षी पार्टी के नेताओं के दिल में जगह बनाई थी जो आज के राजनेताओं के बीच देखने को नहीं मिलती।
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1991 में अटलजी विदिशा से लोकसभा चुनाव लडने का मन बनाया था और इस चुनाव में वो जीते भी थे। लेकिन जीत में योगदान देश के उस पूर्व प्रधानमंत्री का भी था जो उनके मुख्य विरोधी दल के मुखिया थे,चुनाव में टक्कर भी उन्ही की पार्टी से थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस चुनाव में अटल जी के लिए वो किया जो कल्पना से परे है। 

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दरअसल तब के कांग्रेस उम्मीदवार प्रतापभानु शर्मा थे जिन्होने खुद इन दोनो नेताओं के दिल के जुड़ाव को महसुस किया । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापभानु शर्मा ने बताया कि एक रात करीब एक बजे मेरे पास राजीव गांधी का फोन आया। उन्होंने अपने सूत्रों से मिली जानकारी के बाद मुझे फोन करके कहा 'अगले दिन प्लेन से अटलजी और लालकृष्ण आडवाणी विदिशा आ रहे हैं। इनमें से कोई एक विदिशा से चुनाव लड़ेगा और दूसरा अहमदाबाद से।'
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प्रतापभानु समझ नहीं पा रहे थे कि राजीव जी ये बात क्यों बता रहे हैं। तभी राजीव जी ने उनसे फोन पे पूछा 'आप विदिशा के अलावा भोपाल या बैतूल से चुनाव लड़ना चाहें तो आपको वहां से मौका दिया जाएगा।'  इस पर प्रताप जी नहीं माने और कहा कि मैं विदिशा से ही हूं, इसलिए हर हाल में यहीं से चुनाव लडूंगा।

विदिशा लोकसभा के नामांकन जमा करने का आखिरी दिन था। रात में ही कलेक्टर फोन पर कांग्रेस नेता से नामांकन जमा करने का वक्त ले चुका था। दो बजे उन्हे समय दिया गया था। तय समय के पहले ही सभी कांग्रेसी नामांकन जमा करने पहुंचे। प्रतापभानु जैसे ही कलेक्टाेरेट से बाहर आये, तब अटलजी और सीएम सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम आ गया। कांग्रेस उम्मीदवार ने अटलजी के चरण स्पर्श किए और उनसे आशीर्वाद मांगा और तब अटलजी कहा  'मेरा आशीर्वाद आपके साथ है। मैं पार्टी के आदेश का पालन करने विदिशा आया हूं।'


राजीव गांधी जानते थे कि अटल जी के सामने कोई उम्मीदवार नहीं टिक सकता लेकिन शायद वो ये भी चाहते थे कि जीत अटल जी की ही हो तभी अपने उम्मीदवार से सीट बदलने को कहा। ऐसे नेता और ऐसा राजनैतिक सौहार्द आज देखने को नहीं मिलता ।  
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