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अटल जी के यह 9 निर्णय जिन्होंने देश की किस्मत बदल दी

Fri, 17 Aug 2018 01:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Aug 2018 01:28 PM IST
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Atal Bihari Vajpayee: Nine decisive moments as Prime Minister which make him Atal Personality
दिल्ली के एम्स अस्पताल में विराट व्यक्तित्व, कवि, पत्रकार, प्रखर वक्ता, स्टेटमैन और महान शख्सियत वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आखिरी सांस ली। अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शनों के लिए जहां लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। वहीं नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश के राजनेता भी उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए दिल्ली पहुंचे। पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्मृति स्थल में उनका अंतिम संस्कार होगा। लंबी बीमारी के बाद 93 साल की उम्र में वाजपेयी का निधन हो गया था। आज हम आपको बताते हैं मुश्किलों की घड़ी में लिए गए किन फैसलो ने पूर्व प्रधानमंत्री को 'अटल' बनाया था।
Atal Bihari Vajpayee: Nine decisive moments as Prime Minister which make him Atal Personality
पोखरण 2- 1998 में सरकार बने 3 महीने हुए थे कि अटल ने परमाणु परीक्षण का फैसला किया। अमेरिका खिलाफ था। उसकी खुफिया एजेंसी सैटेलाइट्स से निगरानी कर रही थी। उसे चकमा देते हुए 11 व 13 मई 1998 को पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किए। फिर क्लिंटन को लिखा- 'परमाणु हथियारों का इस्तेमाल उस देश के खिलाफ नहीं होगा, जिसकी भारत के प्रति बुरी भावना नहीं है।' परीक्षण के बाद भारत पर अमेरिकी ने कई तरह की पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद भारत के विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अमेरिकी विदेश मंत्री स्ट्रोब टालबोट ने द्वीपक्षीय वार्ता की जिसने दोनों देशों के संबंधों को सुधारने का काम किया। वार्ता के बाद अमेरिका ने भारत को अपना पारंपरिक सहयोगी करार दिया था। इसकी बदौलत ही 2005 में भारत-अमेरिका के बीच परमाणु समझौता हुआ था।
Atal Bihari Vajpayee: Nine decisive moments as Prime Minister which make him Atal Personality
लाहौर यात्रा- पहली बार भारत और पाकिस्तान को बस के जरिए जोड़ा गया था। इस पहली बस में वाजपेयी ने खुद यात्रा की थी। लाहौर के मीनार-ए-पाकिस्तान पर वाजपेयी ने लिखा था कि भारत चाहता है पाकिस्तान संप्रभु और समृद्ध बने। यह पहली बार था जब किसी भारतीय नेता ने पाकिस्तान की संप्रभुता की बात कही थी।
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Atal Bihari Vajpayee: Nine decisive moments as Prime Minister which make him Atal Personality
ऑपरेशन विजय- पाक सेना और आतंकियों की संयुक्त टीमें सीमा लांघकर कश्मीर में घुसीं। अटल ने नवाज शरीफ को फोन कर समझाया भी, लेकिन बात नहीं बनी। फिर करगिल युद्ध शुरू हुआ। भारत में मांग उठी कि सेना को सीमा लांघकर पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए। लेकिन, अटल ने संयम रखा। घुसपैठियों को खदेड़ना शुरू किया। आखिर में पाक सेना को हथियार डालने पड़े। जून-जुलाई 1999 को हुए कारगिल युद्ध के शहीदों को उनकी सरकार ने बढ़ाकर मुआवजा दिया। लोगों के मन में देशप्रेम की भावना को बढ़ाने के लिए शहीदों की अंत्येष्टि सार्वजनिक तौर पर की जाने लगी। इसका ही प्रभाव था कि अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को वाशिंगटन बुलाया और सेना को पीछे हटाने का आदेश दिया था। 
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Atal Bihari Vajpayee: Nine decisive moments as Prime Minister which make him Atal Personality
चंद्रयान- 15 अगस्त 2003 को अटल ने देश के पहले चंद्रमिशन 'चंद्रयान-1' की घोषणा की, जिसे 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया गया। इसका काम चांद की परिक्रमा कर जानकारियां जुटाना था। इस यान ने चांद पर पानी खोजा, जो इसरो की सबसे बड़ी सफलता मानी गई थी।
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