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Manipur: असम राइफल्स की पहल से एक छत के नीचे आईं कुकी-मैतेई छात्राएं, साथ में शिक्षा देने के लिए बनाया केंद्र
Sat, 27 Apr 2024 04:31 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 27 Apr 2024 04:31 PM IST
सार
असम राइफल्स की इस पहल के बारे में बात करते हुए चुराचांदपुर की एक कुकी लड़की ने बताया कि असम राइफल्स ने उनकी बहुत मदद की। लड़की ने आगे कहा कि वह इस केंद्र में खुद को सुरक्षित महसूस करती है।
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असम राइफल्स ने लड़कियों को शिक्षा देने के लिए बनाया शैक्षिक केंद्र
- फोटो : ANI
विस्तार
मणिपुर के उखरुल में असम राइफल्स ने अपने सेंटर ऑफ एजुकेशनल एक्सिलेंस में 36 कुकी, मैतेई और नागा जाति की छात्राओं को आश्रय दिया है। यह केंद्र एक गैर सरकारी संगठन के साथ मिलकर कुकी और मैतेई छात्राओं को शिक्षा देने के लिए खोला गया है। इन 37 छात्राओं में 22 नागा, छह कुकी, आठ मैतेई और एक पंगल छात्रा शामिल हैं। बता दें कि उखरुल क्षेत्र चुराचांदपुर से पांच घंटे की दूरी पर है।
असम राइफल्स ने एक बयान में कहा, "यह शैक्षिक केंद्र अपने लक्ष्य को प्राप्त करने वाले हिंसाग्रस्त क्षेत्रों के उम्मीदवारों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उनके पास अब अपने करियर को बनाने के लिए एक मजबूत रास्ता है। जो सुविधा यहां देख रहे हैं वह एनआईईडीओ और असम राइफल्स के प्रयास का परिणाम है।"
छात्राओं ने दी प्रतिक्रिया
मणिपुर में पिछले साल मई से जारी जातीय हिंसा में अबतक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। असम राइफल्स के इस पहल के बारे में बात करते हुए चुराचांदपुर की एक कुकी लड़की ने बताया कि असम राइफल्स ने उनकी बहुत मदद की है। उन्होंने कहा, "हम इस केंद्र में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। मुझे यकीन है कि केवल शिक्षा ही मणिपुर की स्थिति सुधार सकती है। हम 37 लड़कियां हैं और सभी अलग-अलग जाति से ताल्लुक रखते हैं। हम सभी का लक्ष्य अपनी पढ़ाई को पूरा कर अपने समाज में परिवर्तन लाना है।"
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वहां मौजूद एक मैतेई लड़की ने बताया कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए यहां आई है। उन्होंने कहा, "हम सभी को यहां एक अच्छा अवसर दिया गया है। एक समय मुझे मेरे परिवार की याद आती थी, लेकिन अब हम यहां एक-दूसरे का परिवार बन चुके हैं। मुझे भी लगता है कि शिक्षा समाज में परिवर्तन ला सकता है।"
हिंसाग्रस्त क्षेत्र कांगपोक्पी की रहने वाली एक लड़की ने कहा, "इस स्थिति में कोई भी हमारे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता था। ऐसे में असम राइफल्स का जितना धन्यवाद करूं उतना कम है।" उखरुल की एक लड़की ने कहा, "हम सभी यहां सुरक्षित हैं। हमें अपनी शिक्षा पूरी करने का बड़ा अवसर दिया गया है। मुझे नहीं मालूम कि इस परिस्थिति में मैं अपने समुदाय के लिए कितना काम कर सकती हूं, लेकिन फिलहाल चीजें हमारे लिए बेहतर है।" वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इनमें से कुछ लड़कियों को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से निकाला गया था। उन्हें हवाई सेवाओं के माध्यम से चुराचांदपुर से असम राइफल्स के केंद्र में लाया गया था।
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असम राइफल्स ने एक बयान में कहा, "यह शैक्षिक केंद्र अपने लक्ष्य को प्राप्त करने वाले हिंसाग्रस्त क्षेत्रों के उम्मीदवारों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उनके पास अब अपने करियर को बनाने के लिए एक मजबूत रास्ता है। जो सुविधा यहां देख रहे हैं वह एनआईईडीओ और असम राइफल्स के प्रयास का परिणाम है।"
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छात्राओं ने दी प्रतिक्रिया
मणिपुर में पिछले साल मई से जारी जातीय हिंसा में अबतक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। असम राइफल्स के इस पहल के बारे में बात करते हुए चुराचांदपुर की एक कुकी लड़की ने बताया कि असम राइफल्स ने उनकी बहुत मदद की है। उन्होंने कहा, "हम इस केंद्र में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। मुझे यकीन है कि केवल शिक्षा ही मणिपुर की स्थिति सुधार सकती है। हम 37 लड़कियां हैं और सभी अलग-अलग जाति से ताल्लुक रखते हैं। हम सभी का लक्ष्य अपनी पढ़ाई को पूरा कर अपने समाज में परिवर्तन लाना है।"
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वहां मौजूद एक मैतेई लड़की ने बताया कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए यहां आई है। उन्होंने कहा, "हम सभी को यहां एक अच्छा अवसर दिया गया है। एक समय मुझे मेरे परिवार की याद आती थी, लेकिन अब हम यहां एक-दूसरे का परिवार बन चुके हैं। मुझे भी लगता है कि शिक्षा समाज में परिवर्तन ला सकता है।"
हिंसाग्रस्त क्षेत्र कांगपोक्पी की रहने वाली एक लड़की ने कहा, "इस स्थिति में कोई भी हमारे पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता था। ऐसे में असम राइफल्स का जितना धन्यवाद करूं उतना कम है।" उखरुल की एक लड़की ने कहा, "हम सभी यहां सुरक्षित हैं। हमें अपनी शिक्षा पूरी करने का बड़ा अवसर दिया गया है। मुझे नहीं मालूम कि इस परिस्थिति में मैं अपने समुदाय के लिए कितना काम कर सकती हूं, लेकिन फिलहाल चीजें हमारे लिए बेहतर है।" वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इनमें से कुछ लड़कियों को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से निकाला गया था। उन्हें हवाई सेवाओं के माध्यम से चुराचांदपुर से असम राइफल्स के केंद्र में लाया गया था।