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साइकिल पर सब्जी बेजने वाली महिला को असम पुलिस ने तोहफे में दिया दो-पहिया वाहन
Tue, 12 May 2020 06:54 PM IST
श्रीधर मिश्रा
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, डिब्रूगढ़
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, डिब्रूगढ़
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Tue, 12 May 2020 06:54 PM IST
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जनमोनी गोगोई
- फोटो : Social Media
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असम पुलिस ने डिब्रूगढ़ जिले की एक 20 साल की जनमोनी गोगोई को एक दोपहिया वाहन उपहार में दिया है। यह महिला लॉकडाउन के दौरान अपने माता-पिता को वापस लेने के लिए साइकिल पर घर-घर जाकर सब्जी बेचने का काम करती है।
दरअसल सोशल मीडिया पर जनमोनी गोगोई की सब्जी बेचते हुए एक तस्वीर वायरल हुई। इस तस्वीर में महिला की साइकिल के हैंडल पर बड़े-बड़े बैग लटके हुए हैं और उसके कैरियर पर एक टोकरी है।
जानमोनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने घर को चलाने के लिए परिवार की मदद करनी शुरू कर दी। वो बाजार में सब्जियों को बेचने के लिए अपनी मां की मदद करती थीं, जिसमें उनके बीमार पिता भी शामिल थे।
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डिब्रूगढ़ जिले के बोगीबील इलाके के एक गांव में रहने वाले जनमोनी ने कहा, "मेरे पिता पिछले 18 सालों से बीमार हैं। वह चल नहीं सकते। मेरी मां बोरबारुहा बाजार में सब्जी बेचती हैं। मैं उनकी दो साल से मदद कर रही हूं।"
25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लागू होने के बाद, जानमोनी ने अपने माल को साइकिल पर लाद कर डोर टू डोर बिक्री शुरू कर दी, क्योंकि इस दौरान बोरबरुआ बाजार जाना संभव नहीं था।
इस बीच एसपी श्रीजीत टी के साथ जिला पुलिस के बड़े अधिकारियों ने मुख्यधारा और सोशल मीडिया से उनके बारे में पता किया और जानमोनी से पूछा कि क्या उसे किसी मदद की जरूरत है।
पुलिस उप अधीक्षक पल्लवनमुमेदर ने कहा, "उनके स्वाभिमान ने उन्हें मौद्रिक सहायता लेने से रोक दिया। इसलिए हम उन्हें एक दोपहिया वाहन देने का विचार लेकर आए ताकी वे अपनी सब्जियों को अधिक आराम से और बड़ी मात्रा में ले जा सकें।"
सोमवार को जानमोनी को दुपहिया वाहन देते हुए, मजुमदार ने कहा, "ऐसे समय में जब हर कोई घर के अंदर है, जनमोनी अपने परिवार का समर्थन करने के लिए निकलीं।"
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दरअसल सोशल मीडिया पर जनमोनी गोगोई की सब्जी बेचते हुए एक तस्वीर वायरल हुई। इस तस्वीर में महिला की साइकिल के हैंडल पर बड़े-बड़े बैग लटके हुए हैं और उसके कैरियर पर एक टोकरी है।
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जानमोनी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। 12वीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने घर को चलाने के लिए परिवार की मदद करनी शुरू कर दी। वो बाजार में सब्जियों को बेचने के लिए अपनी मां की मदद करती थीं, जिसमें उनके बीमार पिता भी शामिल थे।
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डिब्रूगढ़ जिले के बोगीबील इलाके के एक गांव में रहने वाले जनमोनी ने कहा, "मेरे पिता पिछले 18 सालों से बीमार हैं। वह चल नहीं सकते। मेरी मां बोरबारुहा बाजार में सब्जी बेचती हैं। मैं उनकी दो साल से मदद कर रही हूं।"
25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लागू होने के बाद, जानमोनी ने अपने माल को साइकिल पर लाद कर डोर टू डोर बिक्री शुरू कर दी, क्योंकि इस दौरान बोरबरुआ बाजार जाना संभव नहीं था।
इस बीच एसपी श्रीजीत टी के साथ जिला पुलिस के बड़े अधिकारियों ने मुख्यधारा और सोशल मीडिया से उनके बारे में पता किया और जानमोनी से पूछा कि क्या उसे किसी मदद की जरूरत है।
पुलिस उप अधीक्षक पल्लवनमुमेदर ने कहा, "उनके स्वाभिमान ने उन्हें मौद्रिक सहायता लेने से रोक दिया। इसलिए हम उन्हें एक दोपहिया वाहन देने का विचार लेकर आए ताकी वे अपनी सब्जियों को अधिक आराम से और बड़ी मात्रा में ले जा सकें।"
सोमवार को जानमोनी को दुपहिया वाहन देते हुए, मजुमदार ने कहा, "ऐसे समय में जब हर कोई घर के अंदर है, जनमोनी अपने परिवार का समर्थन करने के लिए निकलीं।"