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Hindi News ›   India News ›   Assam Election Results 2026: CM Himanta ensures hatrick for BJP in Assam, Know Where is Congress and others

Assam Election Analysis: असम में BJP को कैसे मिली हैट्रिक? खेड़ा-हिमंत विवाद का फायदा नहीं उठा सकी कांग्रेस

Mon, 04 May 2026 10:03 AM IST
Kumar Vivek न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Mon, 04 May 2026 10:03 AM IST
सार

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ऐतिहासिक हैट्रिक लगाने की ओर बढ़ रही है। शुरुआती रुझानों में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की सत्ता बरकरार रहना तय लग रहा है। इस शानदार जीत और कांग्रेस सहित अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रदर्शन का पूरा राजनीतिक विश्लेषण जानने के लिए अभी पढ़ें।

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Assam Election Results 2026: CM Himanta ensures hatrick for BJP in Assam, Know Where is Congress and others
असम विधानसभा चुनाव 2026 - फोटो : amarujala.com

विस्तार

असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती नतीजों और रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी  के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी कर रहा है। 126 सदस्यीय विधानसभा की मतगणना में एनडीए ने रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व पर जनता के अटूट भरोसे को दर्शाता है। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल एक बार फिर सत्ता के जादुई आंकड़े से पिछड़ते हुए नजर आ रहे हैं। 

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घुसपैठ पर सख्ती, एनआरसी, सीएए और परिसीमन का भाजपा को फायदा

इस बार असम चुनाव में 85.96% का भारी मतदान दर्ज किया गया, जो जनता के बीच चुनावी मुद्दों की गंभीरता का सीधा संकेत है। इस चुनाव में मुख्य रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे ज्वलंत मुद्दे हावी रहे। इसके अलावा, वर्ष 2023 में लागू किए गए नए परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा लाभ सत्ताधारी गठबंधन को मिलता दिख रहा है। बेरोजगारी और ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ जैसे बुनियादी मुद्दों के बावजूद हिंदुत्व और क्षेत्रीय पहचान का नैरेटिव ज्यादा हावी रहा।

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'संकल्प पत्र' पर जनता की मुहर और विकास का मजबूत रोडमैप

असम के मतदाताओं ने भाजपा के 31-सूत्रीय 'संकल्प पत्र' पर अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। पार्टी ने सत्ता में वापसी के तीन महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने, घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने और 'जमीन जिहाद' पर रोक लगाकर अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराने का सख्त वादा किया था। आर्थिक मोर्चे पर, राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को 2.24 लाख करोड़ से बढ़ाकर 7.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का ट्रैक रिकॉर्ड और पांच लाख करोड़ रुपये के नए निवेश का विजन निर्णायक साबित हुआ। साथ ही, 'ओरुनोदोई योजना' के तहत जरूरतमंद परिवारों को 3,000 रुपये प्रति माह की सहायता और 40 लाख महिलाओं को 25 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक मदद जैसे कल्याणकारी कदमों ने महिला मतदाताओं को बड़े पैमाने पर भाजपा के पक्ष में लामबंद किया है।

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संपत्ति विवाद का कांग्रेस को नहीं मिला फायदा

चुनाव के दौरान कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर दुबई में संपत्ति और कई पासपोर्ट होने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, सरमा ने इसे सिरे से खारिज करते हुए एक 'पाकिस्तानी सोशल मीडिया समूह' द्वारा रचे गए एआई और फोटोशॉप आधारित फर्जी दस्तावेजों की विदेशी साजिश करार दिया। इस प्रकरण में पुलिस एफआईआर दर्ज होने और सरमा के आक्रामक पलटवार से कांग्रेस का यह हमला बेअसर हो गया और अंततः चुनावी रुझानों में इसका सीधा सहानुभूति लाभ भाजपा और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को ही मिला।

वीआईपी सीटों की जंग और राजनीतिक गठबंधनों का असर

सत्ता के इस संघर्ष में दिग्गजों की साख दांव पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पारंपरिक और सुरक्षित जालुकबारी सीट से मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस के प्रमुख चेहरे गौरव गोगोई जोरहाट सीट से कड़ा मुकाबला पेश कर रहे हैं। गठबंधनों के मोर्चे पर, भाजपा ने असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ 'नेडा' (एनईडीए) के बैनर तले चुनाव लड़ा है। वहीं, कांग्रेस ने रायजोर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) के साथ मिलकर गठबंधन (एएसएम) बनाया था, लेकिन वे जनता का भरोसा जीतने में विफल रहे। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के अकेले चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों का बिखराव हुआ, जिसका सीधा असर दिसपुर और शिबसागर जैसी सीटों पर पड़ा है।

असम में भाजपा की हैट्रिक का क्या मतलब?

असम में एनडीए की यह जीत केवल सत्ता की वापसी नहीं है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के राजनीतिक और वैचारिक दबदबे की मजबूत पुष्टि है। आने वाले समय में राज्य में यूसीसी लागू होने और अवैध घुसपैठ पर सख्त नीतियों के कार्यान्वयन पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। यह जनादेश यह भी तय करता है कि हिमंत बिस्वा सरमा पूर्वोत्तर में भाजपा के सबसे बड़े और निर्विवाद नेता के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर चुके हैं।

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