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Assam: असम में लव-जिहाद के मामलों की होगी जांच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एसओपी विकसित करने के दिए आदेश

Fri, 28 Jul 2023 10:11 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 28 Jul 2023 10:11 PM IST
सार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को पुलिस से राज्य में लव-जिहाद के मामलों की जांच के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करने का आदेश दिया।

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Assam cm Himanta Biswa Sarma asks police to develop SOP to probe cases of love jihad
Himanta Biswa Sarma - फोटो : Social Media

विस्तार

असम में एक मुस्लिम व्यक्ति ने सोमवार को अपनी हिंदू पत्नी और उसके माता-पिता की हत्या कर दी थी, इसके बाद फिर से लव-जिहाद सुर्खियों में आ गया है और इस मामले पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद संज्ञान लिया है। उन्होंने शुक्रवार को पुलिस से राज्य में लव-जिहाद के मामलों की जांच के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करने का आदेश दिया।

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सीएम सरमा ने पुलिस अधीक्षकों के एक सम्मेलन में दावा किया कि लव जिहाद का मूल कारण जबरन धर्म परिवर्तन है। आगे बोले कि राज्य में जल्द ही एक अधिनियम लागू किया जाएगा जिसके माध्यम से सभी समुदायों के लिए विवाह योग्य आयु कानूनी रूप से तय की जाएगी, एकाधिक विवाह रोके जाएंगे और अधिक विधायी कदम उठाए जाएंगे ताकि जब मानदंडों का उल्लंघन करने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए तो जमानत न ले सकें।
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मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि गोलाघाट में ट्रिपल मर्डर केस जिसमें एक 25 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ने सोमवार को अपनी हिंदू पत्नी और उसके माता-पिता की हत्या कर दी थी, वह 'लव जिहाद' का मामला था। उन्होंने यह भी दावा किया कि लव जिहाद की शिकार लड़कियों द्वारा आत्महत्या की कई दुखद घटनाएं हुई हैं। सरमा ने इससे पहले गुरुवार को दावा किया था कि अगर हिंदू और मुस्लिम पुरुष अपने-अपने समुदाय की महिलाओं से शादी करेंगे तो देश में शांति होगी।
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सीएम ने पुलिस से असम से एएफएसपीए हटाने की दिशा में काम करने को कहा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य पुलिस को यह जांच करने का निर्देश दिया कि सशस्त्र बल विशेष शक्तियां (एएफएसपीए) अधिनियम को राज्य से पूरी तरह से कैसे हटाया जा सकता है। एएफएसपीए वर्तमान में 31 जिलों में से आठ में लागू है।

मुख्यमंत्री ने बोंगाईगांव में पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उग्रवाद को काफी हद तक हरा दिया गया है और पुलिस सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है और उन लोगों को निष्क्रिय कर रही है जो फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को हिंसा के रास्ते पर वापस जाने से रोकने के लिए पुलिस को निगरानी रखनी चाहिए।

सीएम सरमा ने कहा कि पुलिस को ऐसी स्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि राज्य से एएफएसपीए पूरी तरह से हटाया जा सके। उग्रवाद से निपटने के लिए वहां सक्रिय सशस्त्र बलों की सहायता के लिए असम सहित तीन पूर्वोत्तर राज्यों में एएफएसपीए दशकों से लागू है।


नवंबर 1990 में पूरे राज्य को एएफएसपीए के तहत 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया गया था और इसे समय-समय पर बढ़ाया गया था। केंद्र द्वारा 2022 में अन्य हिस्सों से इसे हटाने के बाद यह अधिनियम वर्तमान में आठ जिलों में लगाया गया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस से मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज करने को भी कहा और कहा कि छोटी और बड़ी दोनों बरामदगी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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