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तमिलनाडू में मिले हड़प्पा सभ्यता के निशान
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 30 May 2016 06:58 PM IST
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दूसरे चरण की खुदाई के नतीजों से आर्कियोलॅाजिस्ट बहुत खुश हैं
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आर्किओलॅाजीकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई), बेंगलूरू की ब्रांच-6 की ओर से तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के पल्लीसंताई थिडल में खुदाई कराई जा रही है यह खुदाई का यह दूसरा चरण है। यहां खुदाई के दौरान मिट्टी के अंदर से एक खास तरह के ढांचे निकल रहे हैं। पुराने समय में यह जगह एक शहरी केंद्र था। खुदाई के दौरान मिले नतीजों से ऐसा लग रहा है कि यहां हड़प्पा-मोहनजोदड़ो जैसा ही कोई पुरास्थल था।
स्टडी से यह भी पता चलता है कि यह एक अच्छी तरह बना हुआ शहरी केंद्र था, जहां कई तरह की सुविधाएं भी मौजूद थीं। पहले चरण की स्टडी में सिर्फ इतना पता चला था कि यह प्राचीन शहरी आवासीय स्थल था। इसके बाद एएसआई ने कीलाडी गांव में खुदाई का दूसरा चरण शुरू किया था।
दूसरे चरण की खुदाई के नतीजों से आर्कियोलॅाजिस्ट बहुत खुश हैं। सुपरीटेंडिंग आर्कियोलॅाजिस्ट के. अमरनाथ रामकृष्ण का कहना है कि यह तमिलनाडु में अपने तरह की पहली साइट है और यह वैगई नदी के किनारे पर बना विशाल शहरी केंद्र साबित हो सकता है।
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खुदाई का मौजूदा चरण इस साल सितंबर तक चलेगा। खुदाई से मिलने वाले साक्ष्य संगम साहित्य की बातों को सही साबित करते नजर आ रहे हैं, जिनमें प्राचीन तमिल जीवनशैली पर प्रकाश डाला गया है। संगम साहित्य में तकरीबन 2000 साल पहले तमिलनाडु के लोगों और वहां के शासकों के जीवन के बारे मे बताया गया है।
हालांकि अभी तक आर्कियोलॅाजी में ऐसे ठोस सबूत मौजूद नही थे जो संगम साहित्य के दावों को प्रमाणित कर सके। यहां खुदाई का काम लगभग इस साल सितंबर तक चलेगा।
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स्टडी से यह भी पता चलता है कि यह एक अच्छी तरह बना हुआ शहरी केंद्र था, जहां कई तरह की सुविधाएं भी मौजूद थीं। पहले चरण की स्टडी में सिर्फ इतना पता चला था कि यह प्राचीन शहरी आवासीय स्थल था। इसके बाद एएसआई ने कीलाडी गांव में खुदाई का दूसरा चरण शुरू किया था।
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दूसरे चरण की खुदाई के नतीजों से आर्कियोलॅाजिस्ट बहुत खुश हैं। सुपरीटेंडिंग आर्कियोलॅाजिस्ट के. अमरनाथ रामकृष्ण का कहना है कि यह तमिलनाडु में अपने तरह की पहली साइट है और यह वैगई नदी के किनारे पर बना विशाल शहरी केंद्र साबित हो सकता है।
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खुदाई का मौजूदा चरण इस साल सितंबर तक चलेगा। खुदाई से मिलने वाले साक्ष्य संगम साहित्य की बातों को सही साबित करते नजर आ रहे हैं, जिनमें प्राचीन तमिल जीवनशैली पर प्रकाश डाला गया है। संगम साहित्य में तकरीबन 2000 साल पहले तमिलनाडु के लोगों और वहां के शासकों के जीवन के बारे मे बताया गया है।
हालांकि अभी तक आर्कियोलॅाजी में ऐसे ठोस सबूत मौजूद नही थे जो संगम साहित्य के दावों को प्रमाणित कर सके। यहां खुदाई का काम लगभग इस साल सितंबर तक चलेगा।